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Saturday, August 1, 2026
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Chandauli news- प्रेमचंद के सपनों का भारत कैसा हो? राष्ट्रीय संगोष्ठी में विद्वानों ने रखा भविष्य का खाका

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.

दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ गरिमामय समापन, साहित्य, समाज और राष्ट्र निर्माण पर गूंजे सार्थक विचार

परिवर्तन टुडे न्यूज, चन्दौली
सकलडीहा। सकलडीहा पी.जी. कॉलेज के हिन्दी विभाग, पुस्तकालय एवं अपनी माटी संस्थान, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “प्रेमचंद के सपनों का भारत” का शनिवार को गरिमामय वातावरण में समापन हुआ। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने प्रेमचंद के साहित्य को वर्तमान सामाजिक परिदृश्य से जोड़ते हुए राष्ट्र निर्माण, शिक्षा, ग्रामीण जीवन और मानवीय मूल्यों पर गंभीर विमर्श किया। पूरे आयोजन में प्रेमचंद की विचारधारा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने पर विशेष बल दिया गया।

प्रेमचंद का साहित्य भारतीय समाज की आत्मा का जीवंत दस्तावेज : डॉ. गया सिंह

समापन सत्र के मुख्य अतिथि एवं हरिश्चंद्र पी.जी. कॉलेज, वाराणसी के पूर्व प्राचार्य डॉ. गया सिंह ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य केवल कहानी या उपन्यास नहीं, बल्कि भारतीय समाज की आत्मा का सजीव दस्तावेज है। उन्होंने प्रेमचंद, महादेवी वर्मा और जयशंकर प्रसाद के संस्मरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी साहित्य के गंभीर अध्ययन से दूर होती जा रही है। साहित्य ही वह शक्ति है, जो समाज को सही दिशा देने और मानवीय मूल्यों को जीवित रखने का कार्य करता है।

ग्रामीण भारत की पीड़ा और सामाजिक चेतना को अमर स्वर दिया प्रेमचंद ने

विशिष्ट अतिथि प्रो. राजकुमार सिंह, राजकीय महिला पी.जी. कॉलेज, अदलहाट (मिर्जापुर) ने कहा कि प्रेमचंद ने अपने साहित्य में ग्रामीण भारत की वास्तविक तस्वीर, सामाजिक विषमताओं और मानवीय संवेदनाओं को अत्यंत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। मुख्य वक्ता डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार सिंह, शहीद हीरा सिंह राजकीय महाविद्यालय, धानापुर ने कहा कि प्रेमचंद की कहानियाँ और उपन्यास आज भी समाज के हर वर्ग के लिए प्रासंगिक हैं। उनके पात्र आज भी हमारे आसपास जीवंत रूप में दिखाई देते हैं।

राष्ट्रीय चेतना, शिक्षा और सामाजिक सरोकारों पर हुआ गहन चिंतन

हिन्दी विभाग के सहायक आचार्य यज्ञनाथ पाण्डेय ने प्रेमचंद की राष्ट्रीय चेतना, शिक्षा-दृष्टि और सामाजिक सरोकारों पर विस्तार से विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका साहित्य वर्तमान समय में भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद के विचार आज के भारत को समझने और बेहतर समाज के निर्माण में मार्गदर्शक सिद्ध हो सकते हैं।

ऐसे आयोजन साहित्य और शोध की नई पीढ़ी तैयार करते हैं : प्रो. प्रदीप कुमार पाण्डेय

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. प्रदीप कुमार पाण्डेय ने कहा कि राष्ट्रीय संगोष्ठियाँ विद्यार्थियों और शोधार्थियों को भारतीय साहित्य की समृद्ध परंपरा से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी समाज को मानवीय मूल्यों और राष्ट्रीय चेतना का संदेश देता है। उन्होंने संगोष्ठी की सफलता के लिए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया।

देशभर के शोधार्थियों ने प्रस्तुत किए शोधपरक आलेख

संगोष्ठी के संयोजक डॉ. जितेन्द्र यादव ने बताया कि दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सहभागिता कर प्रेमचंद साहित्य के विविध आयामों पर शोधपरक आलेख प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन साहित्यिक विमर्श को नई ऊर्जा प्रदान करने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को भारतीय बौद्धिक परंपरा से जोड़ने का कार्य करते हैं।

कार्यक्रम में डॉ. श्याम लाल सिंह यादव, अजय कुमार यादव, डॉ. रमाकांत गौड़, डॉ. रोहित यादव, डॉ. कामेश सिंह, डॉ. अमितेश सिंह, डॉ. संदीप जायसवाल, महाविद्यालय के शिक्षकगण, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। अंत में प्रो. दयानिधि सिंह यादव ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं उपस्थित जनों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.
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