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Tuesday, August 4, 2026
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Chandauli news- धान की फसल पर तना छेदक का बढ़ा खतरा, कृषि विभाग ने किसानों को किया सतर्क

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.

समय रहते अपनाएं बचाव के उपाय, नहीं तो उत्पादन पर पड़ सकता है गंभीर असर

परिवर्तन टुडे न्यूज
चंदौली। जनपद में धान की फसल को तना छेदक (स्टेम बोरर) कीट के बढ़ते प्रकोप से बचाने के लिए कृषि रक्षा विभाग ने किसानों को सतर्क किया है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी विनोद कुमार यादव ने एडवाइजरी जारी करते हुए किसानों से समय रहते आवश्यक बचाव एवं नियंत्रण के उपाय अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि थोड़ी-सी लापरवाही किसानों की मेहनत पर पानी फेर सकती है और धान की पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है।

फसल को इस तरह पहुंचाता है नुकसान

जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि तना छेदक कीट की सूंडियां नर्सरी से लेकर धान में बालियां निकलने तक फसल को नुकसान पहुंचाती हैं। शुरुआती अवस्था में सूंडी तने के अंदर प्रवेश कर उसे भीतर से खा जाती है, जिससे पौधा सूख जाता है। ऐसे पौधों का सूखा भाग खींचने पर आसानी से हाथ में निकल आता है। वहीं बाली निकलने की अवस्था में संक्रमण होने पर दानों के स्थान पर सफेद एवं खोखली बालियां दिखाई देती हैं, जिन्हें सामान्य भाषा में ‘डेड हार्ट’ कहा जाता है।

उमस भरा मौसम बढ़ा रहा खतरा

उन्होंने बताया कि गर्म एवं आर्द्र (उमस भरे) मौसम में इस कीट का प्रकोप तेजी से फैलता है। यदि समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो धान की उपज पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कृषि विभाग ने बताए प्रभावी बचाव के उपाय

कृषि रक्षा अधिकारी ने किसानों को सलाह दी कि जुलाई के प्रथम पखवाड़े तक धान की रोपाई पूरी कर लें। रोपाई से पहले नर्सरी के पौधों के ऊपरी भाग को काटकर ही खेत में लगाएं। कीटों की निगरानी के लिए प्रति एकड़ चार से पांच फेरोमोन ट्रैप (गंध पाश जाल) लगाएं तथा प्रौढ़ पतंगों को नष्ट करने के लिए प्रकाश जाल (लाइट ट्रैप) का उपयोग करें।

आवश्यकता पड़ने पर करें दवा का प्रयोग

उन्होंने बताया कि आवश्यकता होने पर बाईफेनथ्रिन (10 प्रतिशत ईसी) 500 मिली अथवा क्लोरेनट्रानिलीप्रोल (18.5 प्रतिशत एससी) 150 मिली दवा को 500 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव किया जाए। इसके अलावा कारटाप हाइड्रोक्लोराइड (4 प्रतिशत जीआर) अथवा फिप्रोनिल (0.3 प्रतिशत जीआर) की 18 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर मात्रा का खेत में तीन से पांच सेंटीमीटर स्थिर पानी रखते हुए बिखराव करने से भी प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है।

किसानों से सतर्क रहने की अपील

जिला कृषि रक्षा अधिकारी विनोद कुमार यादव ने किसानों से अपील की है कि वे नियमित रूप से अपनी फसल का निरीक्षण करते रहें। कीट का प्रकोप दिखाई देते ही कृषि विभाग की सलाह के अनुसार आवश्यक उपाय अपनाएं, ताकि धान की फसल सुरक्षित रहे और बेहतर उत्पादन प्राप्त हो सके।

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रजनी कांत पाण्डेय
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मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.
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