परिवर्तन टुडे न्यूज, चन्दौली
Story By- मनोज कुमार मिश्रा
चहनिया। महासमाधिधारी परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित तथा परम पूज्य आचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री 108 धर्मसागर जी महाराज एवं मुनि श्री 108 भावसागर जी महाराज का मंगल विहार वाराणसी की ओर जारी है। इसी क्रम में गुरुवार प्रातः उनका चहनिया आगमन हुआ, जहां दिगंबर जैन समाज, वाराणसी के श्रद्धालुओं ने आगामी चातुर्मास के लिए श्रद्धापूर्वक श्रीफल अर्पित कर मंगलकामनाएं व्यक्त कीं।
इस अवसर पर मुनि संघ की आहारचर्या संपन्न हुई। साथ ही मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज का 51वां अवतरण दिवस श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान पाद-प्रक्षालन एवं पूजन-अर्चन के साथ जरूरतमंदों को फल, वस्त्र एवं औषधियों का वितरण भी किया गया। बताया गया कि मुनि संघ का वाराणसी में मंगल प्रवेश लगभग 11 जुलाई को संभावित है। विशेष बात यह है कि लगभग 50 वर्षों के बाद पहली बार वाराणसी में दिगंबर जैन मुनि संघ का चातुर्मास होने जा रहा है, जिससे जैन समाज में विशेष उत्साह का वातावरण है।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री 108 भावसागर जी महाराज ने कहा कि भक्ति ही जीवन को सफल बनाने का सर्वोत्तम साधन है। भक्ति से तन, मन, आत्मा, परिवार, समाज और राष्ट्र का शुद्धिकरण होता है। उन्होंने कहा कि पूजा-भक्ति अमृत के समान है तथा मोक्ष के द्वार का ताला भक्ति रूपी चाबी से ही खुलता है। भक्ति मन के विकारों को दूर कर जीवन में आनंद, ऊर्जा, उत्साह और सफलता का संचार करती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को ऐसी भावना रखनी चाहिए कि प्रभु की भक्ति, वंदना और तीर्थ दर्शन के लिए उसके चरण सदैव तत्पर रहें, जीवन भर प्रभु का स्मरण बना रहे, हृदय श्रद्धा और प्रेम से परिपूर्ण हो तथा हाथ सदैव सेवा और सहयोग के लिए आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि दान, पूजा, विनय और प्रभु के गुणों के प्रति अनुराग ही सच्ची भक्ति है। यही भक्ति मनुष्य को आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर अग्रसर करती है और जीवन को सार्थक बनाती है। कार्यक्रम में दिगंबर जैन समाज के अनेक गणमान्य श्रद्धालु एवं क्षेत्र के सम्मानित नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।



