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Tuesday, October 13, 2026
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Chandauli news- मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता से ही बनेगा संवेदनशील समाज : प्रो. प्रदीप कुमार पांडेय

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.

सकलडीहा पीजी कॉलेज में आयोजित हुआ जागरूकता कार्यक्रम, विद्यार्थियों ने पोस्टर बनाकर दिया सकारात्मक संदेश

परिवर्तन टुडे न्यूज, चन्दौली
सकलडीहा। पीजी कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग की ओर से विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें अपनी भावनाओं, अनुभवों और मानसिक समस्याओं को खुलकर व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करना था। इस दौरान विद्यार्थियों ने आकर्षक पोस्टरों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित किया।

शैक्षणिक सफलता के लिए मानसिक स्वास्थ्य जरूरी

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. प्रदीप कुमार पांडेय ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मानसिक स्वास्थ्य विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन, व्यक्तित्व विकास और जीवन में सफलता का महत्वपूर्ण आधार है। तनावपूर्ण परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना, अपनी भावनाओं को समझना और आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता लेना बेहद आवश्यक है।

उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि मानसिक परेशानी होने पर अपनी समस्याओं को मन में दबाकर रखने के बजाय शिक्षकों, परिवार के सदस्यों और विशेषज्ञों से सहायता लेनी चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा विद्यार्थियों को सकारात्मक और सहयोगपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

पोस्टरों के माध्यम से दिया जागरूकता का संदेश

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर आकर्षक एवं संदेशपरक पोस्टर बनाए। इन रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अपनी सोच और विचारों को अभिव्यक्त किया। साथ ही, उन्होंने तनाव, भावनात्मक चुनौतियों और मानसिक समस्याओं से जुड़े विषयों पर खुलकर चर्चा की।

कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को अपनी भावनाओं को समझने, समस्याओं को साझा करने और जरूरत पड़ने पर दूसरों की सहायता लेने के लिए प्रेरित किया।

भावनात्मक जरूरतों को समझना आवश्यक

मनोविज्ञान विभाग की प्रभारी डॉ. सीता मिश्रा ने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए उनकी भावनात्मक आवश्यकताओं को समझना और उन्हें सकारात्मक वातावरण प्रदान करना आवश्यक है। मानसिक समस्याओं के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाकर ही विद्यार्थियों को बेहतर सहयोग दिया जा सकता है।

उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर संवाद को प्रोत्साहित करने और विद्यार्थियों की समस्याओं को गंभीरता से समझने की आवश्यकता पर बल दिया।

दूसरों के अनुभवों को संवेदनशीलता से सुनें

मनोविज्ञान विभाग की सहायक आचार्य डॉ. वंदना कुमारी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन के अनुभव और मानसिक संघर्ष अलग-अलग होते हैं। इसलिए किसी व्यक्ति की बात सुने बिना उसके अनुभवों के बारे में धारणा नहीं बनानी चाहिए। दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना, उनकी समस्याओं को संवेदनशीलता से समझना और आवश्यकता पड़ने पर सहयोग देना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा इससे जुड़े सामाजिक संकोच और भ्रांतियों को दूर करने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी समस्याएं साझा करने के लिए सुरक्षित एवं सहयोगपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना और जरूरत के समय उचित सहायता दिलाना सामूहिक जिम्मेदारी है।

मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना महत्वपूर्ण

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य के समान महत्वपूर्ण है। मानसिक समस्याओं पर खुलकर बातचीत करना, दूसरों के अनुभवों को समझना और आवश्यकता पड़ने पर सहायता लेना स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

कार्यक्रम के समापन पर इस बात पर जोर दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे निरंतर सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाना चाहिए। विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता और उनके रचनात्मक पोस्टरों ने यह संदेश दिया कि युवाओं को अपनी भावनाएं व्यक्त करने तथा अनुभव साझा करने का अवसर देकर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संकोच और भ्रांतियों को दूर किया जा सकता है।

कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि किसी की बात ध्यानपूर्वक सुनना, उसके अनुभवों को समझना और बिना किसी पूर्वाग्रह के उसका साथ देना मानसिक रूप से स्वस्थ एवं संवेदनशील समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

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रजनी कांत पाण्डेय
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मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.
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