परिवर्तन टुडे चन्दौली
Story By- मनोज कुमार मिश्रा
चहनियां। बलुआ घाट पर मकर संक्रांति पर्व पर श्रद्धालुओं के पश्चिम वाहिनी घाट पर अल सुबह से ही मां गंगा में स्नान के लिए भारी भीड़ उमड़ी रही। विद्वान पंडित व आचार्य लोग मकर संक्रांति के महत्व के बारे में बताते है कि सूर्य के धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करने का पर्व है। मकर संक्रांति सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना ही मकर संक्रांति कहलाता है। इस दिन भगवान भास्कर के उत्तरायण होने से ठंड कम होने और नए कृषि चक्र की शुरुआत का प्रतीक है। इससे प्राकृतिक में नई ऊर्जा आती है। और यह दान पूण्य के लिए शुभ माना जाता है।
हिंदू धर्म में एक माह को दो पक्षों में बांटा गया। कृष्णा पक्ष और शुक्ल पक्ष इसी प्रकार वर्ष को दो अयनो में बांटा गया है। उत्तरायण और दक्षिणायण यदि दोनों को मिला दिया जाए तो एक वर्ष पूर्ण हो जाता है। मकर संक्रांति के दिन से सूर्य की उत्तरायण गति प्रारंभ हो जाती है। इसलिए मकर संक्रांति को उत्तरायण भी कहते हैं। उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए यह दिन जप, तप, दान , स्नान, श्राद्ध, तर्पण, आदि धार्मिक क्रियाओं का विशेष महत्व दिया जाता है।
मकर संक्रांति तिथि पर सूर्य देव को तिल अर्पित किये जाते हैं। इस दिन से पिता और पुत्र यानी सूर्य देव और शनि देव के मधुर संबंध मधुर हुए थे। मकर संक्रांति पर्व पर खिचड़ी के रूप में जाना जाता है। गुरुवार को मकर संक्रांति पर्व को लेकर बाजार व गांव, चट्टी, चौराहों पर काफी चहल-पहल बनी रही। इस पर्व पर हर घर के लोग दही , चूरा, गट्टा, तिलकुट, पट्टी, खिचड़ी खाकर सभी लोग मकर संक्रांति त्यौहार मनाये। वही युवा बच्चे सुबह से लेकर शाम तक पतंग उड़ा कर आपस में खुशियां बांटी। इसी क्रम में महुअर, टांडा, उतडी, कैथी, पूरा विजई, सैफपुर, तिरगांवा, नादी ,निधौरा समस्त गंगा तटीय गांव के घाटों पर भारी भीड़ उमड़ी रही।
वही सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थाना प्रभारी अतुल कुमार प्रजापति अपने मातहतो के साथ गुरुवार को अल सुबह से ही पूरी कमान अपने हाथ में लेकर डटे रहे। पुलिस की चाक चौबंद व्यवस्था से स्नान का पर्व सवकुशल संपन्न कराया। दूसरी तरफ प्राइवेट गोताखोर, एनडीआरफ की टीम ने गंगा में वेरीकेटिंग नांव व से श्रद्धालुओं पर नजरे रखे हुए थे।



