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Thursday, March 19, 2026
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दिल में छेंद और मूक वाधिर बच्चो की इलाज शुरू होने से गरीबों को मिली संजीवनी

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.

दिल में छेंद 13 मूक वाधिर 5 ,पैर टेढ़ा 16 और कटे ओंठ 9 को बच्चों का हुआ इलाज

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सकलडीहा सीएचसी पर सुविधा

परिवर्तन टुडे चन्दौली
सकलडीहा। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्चों में जन्मजात बिमारियों 9 प्रकार की गंभीर बिमारियों का इलाज और आपरेशन की सुविधा नि:शुल्क होता है। स्वास्थ्य विभाग की इस योजना के तहत गरीब परिवार के बच्चों को काफी सहुलियत मिल रहा है। सकलडीहा सीएचसी पर अब तक दिल में छेंद 13, मूक वाधिर 5 ,पैर टेढ़ा 16 और कटे ओंठ 9 को बच्चों का आपरेशन और इलाज सकुशल हुआ है। वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डा.संजय यादव के नेतृत्व में आरकेबीएस टीम लगातार विजिट कर गरीब बच्चों को लाभ दिलाने में जुटी है। इस प्रकार की सुविधा से गरीब परिवार की आर्थिक संकट से जूझने से निजात मिल रहा है।

जन्मजात बच्चे जीरो से 19 साल के बच्चों को हृदय में छेंद, पैर टेढ़ा होना,मूक बाधिर( गूंगा बहरा बच्चे) रीढ़ की हड्डी में जन्मजात विसंगति,कटे ओंठ और ताल,डाउन सिड्रोम इत्यादि कुल 9 प्रकार की जांच स्वास्थ्य विभाग की राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत नि:शुल्क इलाज और आपरेशन की सुविधा मिलता है। इसके लिये कुल चार सदस्यी टीम प्रत्येक सीएचसी पर तैनात है।

इस क्रम में सकलडीहा सीएचसी के अर्न्तगत अबतक कुल अब तक दिल में छेंद 13, मूक वाधिर 5 ,पैर टेढ़ा 16 और कटे ओंठ 9 को बच्चों का आपरेशन और इलाज सकुशल हुआ है। सोमवार को भी खड़ेहरा गांव के सात वर्षीय दिव्यांशु राय पुत्र धीरेन्द्र राय के बेटे के दिल में छेद होने पर आपरेशन के लिये पंजीयन किया गया।

इस बाबत वरिष्ठ चिकित्सक डॉ.संजय यादव ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की इस योजना से गरीब परिवार को काफी सहुलियत होता है।

आंगनबाड़ी और परिषदीय स्कूलों में टीम करती जांच

जन्मजात बिमारियों का पहचान के लिये आरकेबीएसके टीम साल में दो बार आगनबाड़ी केन्द्र और एक बार परिषदीय स्कूलों में बच्चों की कैंप लगाकर जांच पड़ताल करती है। जन्मजात बिमारियों का लक्षण मिलने पर बच्चे का पंजीयन कराकर इलाज और आपरेशन की सुविधा दिलाया जाता है।

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