परिवर्तन टुडे न्यूज, चन्दौली
सकलडीहा। सकलडीहा इंटर कॉलेज में शैक्षिक उन्नयन एवं क्षमता संवर्धन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें सकलडीहा और चहनिया विकासखंड के विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने सहभागिता की। संगोष्ठी में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने, शैक्षिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयास करने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सांसद दर्शना सिंह, साधना सिंह और सूर्यमुनि तिवारी उपस्थित रहे।
शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर
संगोष्ठी में शिक्षा के क्षेत्र में आ रहे बदलावों, विद्यालयों की भूमिका और शैक्षिक उन्नयन के लिए सामूहिक प्रयासों के महत्व पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने शिक्षा को समाज और राष्ट्र के विकास का आधार बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए।विद्यालय के प्रधानाचार्य घनश्याम त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षा आत्मा का पौष्टिक भोजन है। इसके लिए निरंतर प्रयास करना आवश्यक है। सतत परिश्रम और समर्पण के माध्यम से ही शिक्षा के क्षेत्र में अपेक्षित सफलता प्राप्त की जा सकती है।
सकलडीहा इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य घनश्याम त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षा आत्मा का पौष्टिक भोजन है। इसके लिए निरंतर प्रयास करना आवश्यक है। सतत परिश्रम और समर्पण के माध्यम से ही शिक्षा के क्षेत्र में अपेक्षित सफलता प्राप्त की जा सकती है।
प्रधानाचार्यों की रही सहभागिता
कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय विद्या मंदिर, भट्टी के प्रधानाचार्य डॉ. प्रमोद कुमार पांडेय ने किया, जबकि अध्यक्षता सकलडीहा इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य घनश्याम त्रिपाठी ने की।
संगोष्ठी में विवेक कुमार, माटीगांव; आशुतोष मोहन, टांडा; राजकुमार, सदलपुरा तथा राजकीय इंटर कॉलेज, दिघवट की प्रधानाचार्य पूनम सिंह सहित विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य उपस्थित रहे।
शिक्षक और कर्मचारी भी रहे मौजूद
इस अवसर पर विद्यालय के सत्य मूर्ति ओझा, अभय शंकर पांडेय संजय पांडेय, राजबली प्रसाद, संतोष विश्वकर्मा, संजीव कुमार यादव, प्रदीप कुमार, मिथिलेश कुमार तिवारी, संजय कुमार मिश्रा, मोहम्मद फैज, अनिल कुमार और डॉ. राजीव श्रीवास्तव सहित विद्यालय के शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
संगोष्ठी का उद्देश्य शैक्षिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना तथा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को प्रेरित करना रहा।








