अभिजीत मुहूर्त में 9 मिनट तक रामलला के ललाट पर पड़ी सूर्य की दिव्य किरणें, अयोध्या में उमड़ा आस्था का महासागर
परिवर्तन टुडे डेस्क
अयोध्याधाम। अयोध्या में रामनवमी के पावन अवसर पर शुक्रवार दोपहर ठीक 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में रामलला का अलौकिक सूर्य तिलक संपन्न हुआ। “भय प्रकट कृपाला दीन दयाल” की मंगल ध्वनि के बीच जब सूर्य की नीली किरणें भगवान के ललाट पर पड़ीं, तो मानो त्रेता का वह दिव्य क्षण सजीव हो उठा—रामलला का जन्म।
प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह दूसरा सूर्य तिलक था, जिसमें लगभग 9 मिनट तक सूर्य की किरणों ने गर्भगृह को दिव्यता से भर दिया। इस अद्भुत दृश्य के साक्षी स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बने, जिन्होंने दूरदर्शन के माध्यम से इस क्षण का दर्शन किया।

गर्भगृह में 14 आचार्यों की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा-अर्चना हुई, तत्पश्चात भव्य आरती संपन्न हुई। सूर्य तिलक के उपरांत रामलला को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया। इस दिव्य आयोजन के लिए विज्ञान और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला—अष्टधातु के 20 पाइपों और 65 फीट लंबे विशेष तंत्र के माध्यम से 4 लेंस और 4 दर्पणों द्वारा सूर्य की किरणों को सीधे भगवान के मस्तक तक पहुंचाया गया।
प्रातःकाल से ही रामलला के दरबार को पुष्पों से सजाया गया, 5:30 बजे मंगल आरती के साथ भगवान को पीतांबर धारण कराया गया। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए दर्शन समय बढ़ाकर सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक कर दिया गया। रामनगरी में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा—करीब 10 लाख श्रद्धालु रामलला के दर्शन को पहुंचे। राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ पर श्रद्धा की लंबी कतारें इस दिव्य उत्सव की साक्षी बन गईं।





