डेढ़ावल और ओरवा ताल में हजारों एकड़ फसल पानी में डूबी, किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की
परिवर्तन टुडे न्यूज, चन्दौली
सकलडीहा। पिछले कई दिनों से हो रही लगातार बारिश और नहरों में पानी छोड़े जाने से क्षेत्र के किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बारिश और नहर के पानी से सकलडीहा तहसील क्षेत्र के दर्जनों गांवों में खेत जलमग्न हो गए हैं। डेढ़ावल और ओरवा ताल क्षेत्र में हजारों एकड़ धान की फसल पानी में डूब गई है। जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से किसानों में फसल बर्बाद होने को लेकर गहरा आक्रोश है।
किसानों ने जिलाधिकारी को पत्रक सौंपकर जलनिकासी की तत्काल व्यवस्था कराने, नहरों और जलनिकासी मार्गों की साफ-सफाई कराने तथा फसल नुकसान का सर्वे कराकर नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की। इस दौरान किसानों ने बंधी प्रभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई।
दर्जनों गांवों की फसल प्रभावित
कई दिनों से खेतों में पानी जमा होने के कारण धान की फसल खराब होने की आशंका बढ़ गई है। सकलडीहा, डेढ़ावल, खड़ेहरा, मनिहरा, जलालपुर, रिष्टि, लेहरा, इटवा, ओरवा, दुर्गापुर, कांधी, विशुनपुरा और धरहरा सहित दर्जनों गांवों के किसानों की फसल जलमग्न है। किसानों का आरोप है कि जलनिकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण हर वर्ष उन्हें जलभराव की समस्या से जूझना पड़ता है।
डेढ़ावल में किसानों ने जताया विरोध
डेढ़ावल गांव के किसानों का आरोप है कि अजरौरा-डेढ़ावल-मुड़ेहरा ड्रेन की साफ-सफाई के नाम पर केवल औपचारिकता पूरी की गई। नालियों और जलनिकासी मार्गों की समुचित सफाई नहीं होने से बारिश का पानी खेतों में जमा हो गया है। इससे धान की फसल को भारी नुकसान होने की आशंका है।
जलभराव को लेकर किसान समरजी चौहान, संतोष चौहान, सियाराम, धरणीधर तिवारी, दुलारे, प्यारे, राढ़ू यादव, जय सिंह, सुनील, जित्तू, मंगरू, पुरुषोत्तम, राजबली, अमरावती, धर्मदेव सहित अन्य किसानों ने विरोध जताया और तत्काल जलनिकासी की व्यवस्था कराने की मांग की।
बंधी प्रभाग के एसडीओ अतुल गुप्ता ने बताया कि जेई को जलनिकासी मार्गों की साफ-सफाई कराने का निर्देश दिया गया है।
नहरें लबालब, पानी निकासी का रास्ता बंद
किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि खेतों से पानी निकालने के लिए बनी नहरें और नालियां पहले से ही पानी से लबालब हैं। ऐसे में खेतों का पानी कहां निकाला जाए, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि समय रहते जलनिकासी की व्यवस्था नहीं किए जाने से स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से मौके पर पहुंचकर जलभराव की स्थिति का जायजा लेने तथा खेतों से पानी निकालने की तत्काल व्यवस्था कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द पानी नहीं निकाला गया तो धान की फसल पूरी तरह खराब हो सकती है और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
इस संबंध में एसडीएम आकांक्षा सिंह ने बताया कि पानी की निकासी के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
फसल नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग
डेढ़ावल और ओरवा ताल क्षेत्र में फसल जलमग्न होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जलभराव वाले क्षेत्रों का सर्वे कराकर फसल नुकसान का आकलन कराया जाए। धान की फसल खराब होने की स्थिति में प्रभावित किसानों को नियमानुसार सहायता और मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।
किसानों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से जलभराव की समस्या बनी हुई है। हर वर्ष बारिश के दौरान खेतों में पानी भर जाने से खेती प्रभावित होती है, जिससे किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाता है। किसानों ने स्थायी जलनिकासी व्यवस्था कराने की भी मांग उठाई है।


