परिवर्तन टुडे न्यूज, चन्दौली
सकलडीहा। सावन का महीना चल रहा है, लेकिन क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली दरियापुर माइनर सूखी पड़ी है। सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलने से हजारों एकड़ कृषि भूमि असिंचित रह गई है। धान की रोपाई और फसलों की सिंचाई प्रभावित होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही हैं। यदि जल्द ही माइनर में पानी नहीं छोड़ा गया तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
तेरह किलोमीटर तक सूखी पड़ी माइनर, खेतों तक नहीं पहुंचा पानी
सरेहुआ से निकलने वाली दरियापुर माइनर लगभग 13 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए रूपेठा, चांदपुर, कटेहरा, बहबलपुर, चकरिया, बथावर, दरियापुर, घरचित, सकलपुर, रतनपुरा, ओड़वली, पदुमनाथपुर, तेनुवट, चतुर्भुजपुर, बरठी, बहरवानी, खोर, मनियारपुर, ओनावल, डैना तथा तुलसी आश्रम होते हुए अगहरबीर बहुरिया तक पहुंचती है। इसी माइनर से क्षेत्र के सैकड़ों किसानों की हजारों एकड़ भूमि की सिंचाई होती है।
घास-फूस और जलकुंभी से पटी नहर, बढ़ी किसानों की परेशानी
लंबे समय से पानी नहीं आने के कारण रजवाहा और माइनर घास-फूस तथा जलकुंभी से भर गए हैं। बरसात के मौसम में भी खेत सूखे पड़े हैं। धान की फसल समय पर पानी नहीं मिलने से प्रभावित हो रही है, जिससे किसानों के सामने आजीविका का संकट गहराने लगा है।
किसानों का अल्टीमेटम— जल्द पानी छोड़िए, नहीं तो होगा आंदोलन
किसान नेता बांसदेव यादव, मुकेश कुमार, राजीव दीक्षित, मुरली राजभर, नितिन तिवारी सहित अनेक किसानों ने सिंचाई विभाग को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तत्काल माइनर में पानी नहीं छोड़ा गया तो क्षेत्र के किसान आंदोलन करने को विवश होंगे। किसानों का कहना है कि समय रहते सिंचाई व्यवस्था बहाल नहीं हुई तो धान की फसल चौपट हो जाएगी।
विभाग का दावा— गंगा में जलस्तर कम होने से आई समस्या
उधर, सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गंगा नदी में पर्याप्त जल उपलब्ध न होने के कारण नहरों में पानी नहीं छोड़ा जा सका है। हालांकि किसानों का कहना है कि विभाग को वैकल्पिक व्यवस्था कर शीघ्र सिंचाई सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि उनकी मेहनत और फसल दोनों सुरक्षित रह सकें।
◼ किसानों की मांग— तत्काल छोड़ा जाए पानी, बचाई जाए खरीफ की फसल
क्षेत्रीय किसान बांसदेव यादव, मुकेश कुमार, राजीव दीक्षित, मुरली राजभर, नितिन गोंड सहित अन्य ने प्रशासन से मांग की है कि दरियापुर माइनर की तत्काल सफाई कराकर उसमें पानी छोड़ा जाए। उनका कहना है कि यदि अब भी सिंचाई व्यवस्था बहाल नहीं हुई तो हजारों एकड़ धान की फसल प्रभावित होगी और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।



