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Thursday, March 19, 2026
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कृष्ण की आत्मा है राधा – श्री मदन मोहन दास महाराज

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.

कथा पंडाल से दिलीप कुमार द्विवेदी की खास रिपोर्ट

होलागढ़ । प्रयागराज । विकासखंड होलागढ़ के ग्राम सभा चौबारा दुबान में हरेंद्र नाथ द्विवेदी के यहां चल रही श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिवस में  भागवत कथा में शनिवार को कथा व्यास श्री मदन मोहन दास महाराज जी ने भगवान श्री कृष्ण-  सुदामा मित्रता का वर्णन , दत्तात्रेय  की कथा , राजा परीक्षित को ज्ञान कथा ,कालिया दमन ,लीला महा रास लीला आदि का अत्यंत मनोहारी वर्णन किया ।   

विकास खण्ड होलागढ़ के ग्राम सभा चौबारा दुबान में निरंतर सात दिनों चल रही श्रीमद भागवत कथा में बड़ी संख्या में श्रोता कथा श्रवण कर रहे है तथा कथा के बीच में झांकी के माध्यम से लीलाओं का आनंद लेते आ रहे हैं श्रीमद भागवत कथा के सातवें दिन कथा व्यास मदन मोहन दास जी महाराज ने कथा वाचन करते हुए भगवान कृष्ण के 16108 विवाह का वर्णन करते हुए दत्तात्रेय की कथा श्रवण कराई। इसके बाद करुण प्रसंग सुदामा चरित्र की कथा के दौरान कथा व्यास सहित सभी श्रोताओं की आंखों में आंसू आ गए। भागवत कथा सुनने के लिए नगर की सैकड़ों महिलाएं, पुरुष, युवा सहित अनेक धर्मप्रेमी बंधू उपस्थित रहे।

सुदामा चरित्र की कथा के बाद भागवत कथा की सूची के पश्चात कथा का विश्राम किया गया। चौबारा  दुबान  में निरंतर सात दिनों से संगीतमयी श्रीमद भागवत कथा चल रही है जिसमें संत मदन मोहन दास जी महाराज द्वारा संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के चलते श्रीकृष्ण रुक्मणि की कथा के बाद भगवान कृष्ण के 16108 विवाह का विस्तार से वर्णन किया। इसके बाद दत्तात्रेय की कथा के पश्चात व्यास जी ने कई प्रसंगों को सूक्ष्म में कहते हुए भगवान कृष्ण के सखा सुदामा की कथा का वर्णन किया।

जिसमें सभी श्रोताओं की आखों में आंसू झलक आए। कृष्ण लीला का वर्णन करते हुए श्रीकृष्ण की अनेकों कथाओं को अपने ढंग से श्रोताओं को सुनाई और सुदामा और कृष्ण की कथा से हमें मित्रता कैसी करनी चाहिए यह बतलाते हुए कहा सुदामा जैसा मित्र कलयुगी संसार में नहीं मिल सकता। देख सुदामा की दीन दशा करुणा करके करुणानिधि रोए, पानी परात को हाथ लियो नहिं नैनन के जल सो पग धोए।

कथा के आखरी में भागवत की सूची सुनाई बताया जाता है जो भक्त सात दिनों तक किसी कारणवश कथा न सुन पाए अगर वह आखरी दिन कथा की सूची सुन लें, तो उसको पूरी कथा श्रवण करने का लाभ प्राप्त होता है। कथा के दौरान भगवान कृष्ण और मित्र सुदामा की लीला का मंचन किया गया। जिसमें सभी श्रोताओं की आंखों में पानी झलक आया।

भगवान श्री कृष्ण के रास लीला पर कई झांकियां प्रस्तुत की गई और भजन कीर्तन करते हुए बड़े धूमधाम से मनाया गया नारायण की रास लीला, कार्यक्रम के आयोजक बृजेश कुमार द्विवेदी , बृजेंद्र कुमार द्विवेदी ,बृज किशोर द्विवेदी व सहयोगी सोनू द्विवेदी ,अनिल कुमार द्विवेदी ,आदर्श द्विवेदी , अंकित द्विवेदी , शिवम द्विवेदी ,गौरव द्विवेदी ,अंकुश द्विवेदी सहित समस्त ग्रामवासी कथा स्थल पर उपस्थित रहे।

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