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Monday, July 27, 2026
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Chandauli news- बड़ी तादाद में नजर आने वाले ” गिद्ध , अब तेजी से हो गए गायब

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.

परिवर्तन टुडे चन्दौली
Story By- सुरेंद्र सिंह नागवंशी
चकिया। एक समय था जब पहाडी क्षेत्रों मे गांव-देहात के आसमान में कभी बड़ी तादाद में नजर आने वाले गिद्ध अब तेजी से गायब हो रहे हैं। हालात इतने चिंताजनक हैं कि विशेषज्ञ इसे “मूक आपदा” बता रहे हैं। प्रकृति के ये ‘सफाईकर्मी’ खत्म होने की कगार पर हैं, और इसके दुष्परिणाम अब सीधे इंसानी जिंदगी पर दिखने लगे हैं।

सूना पड़ा आसमान

कुछ साल पहले तक किसी भी मृत पशु के आसपास गिद्धों का झुंड आम दृश्य था, लेकिन अब महीनों तक एक भी गिद्ध नजर नहीं आता। ग्रामीण इलाकों में यह बदलाव साफ महसूस किया जा रहा है। 90-95% तक गिर गई आबादी वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले दो दशकों में भारत में गिद्धों की संख्या में 90 से 95 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। कई प्रजातियां अब विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी हैं।

दवा बनी जानलेवा

मवेशियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दर्द निवारक दवाएं गिद्धों के लिए जहर बन गई है। इन दवा से उपचारित पशुओं के शव खाने से हजारों गिद्धों की मौत हो चुकी है।

बीमारियों का बढ़ता खतरा

गिद्धों के कम होने से मृत पशु खुले में सड़ रहे हैं, जिससे संक्रमण और खतरनाक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति आने वाले समय में स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है। ठिकाने भी हो रहे खत्म अधिकांश जगह पर अंधाधुंध कटाई और बदलते पर्यावरण के कारण गिद्धों के घोंसले और सुरक्षित स्थान तेजी से खत्म हो रहे हैं, जिससे इनके अस्तित्व पर संकट और गहरा गया है।

उम्मीद की हल्की किरण

हाल के दिनों में कुछ क्षेत्रों में गिद्धों के छोटे झुंड देखे गए हैं, जो संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।

क्या करना होगा

प्रतिबंधित दवाओं पर सख्ती से रोक,गिद्ध संरक्षण क्षेत्रों का विस्तार,आम लोगों में जागरूकता अभियान ,बड़े पेड़ों और वन क्षेत्रों का संरक्षण,अगर ऐसा होना शुरू हो जाएगा तो हो सकता है जो कुछ प्रजातियां विलुप्त हो चुकी है शायद नजर आ जाएंगे।।

विशेषज्ञों की चेतावनी

विशेषज्ञ साफ तौर पर चेतावनी दे रहे हैं कि यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में गिद्ध पूरी तरह गायब हो सकते हैं।

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.
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