427वें जन्मोत्सव पर उमड़ा आस्था का सैलाब, बाबा की साधना और सिद्धियों की कथाओं ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर
परिवर्तन टुडे न्यूज, चंदौली। घोर अघोरेश्वर बाबा कीनाराम की जन्मस्थली एवं तपस्थली रामगढ़ में चल रहे 427वें जन्मोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पूरा क्षेत्र बाबा की भक्ति में डूबा नजर आया। देश-प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर बाबा कीनाराम के दर्शन-पूजन किए। मठ परिसर से लेकर आसपास के करीब पांच किलोमीटर क्षेत्र तक श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दी। चारों ओर ‘बाबा कीनाराम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से वातावरण गुंजायमान रहा।
सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर शाम तक चलता रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में शीश नवाकर सुख-समृद्धि की कामना की। मठ परिसर में श्रद्धा, भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद एवं भोजन की भी व्यवस्था की गई, जिसका बड़ी संख्या में लोगों ने लाभ उठाया।
बाबा कीनाराम की महिमा में आज भी अटूट आस्था
गोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने बाबा कीनाराम के जीवन, साधना, वैराग्य और उनकी आध्यात्मिक शक्ति पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि बाबा कीनाराम केवल एक महान संत ही नहीं, बल्कि अघोर परंपरा के ऐसे सिद्ध पुरुष थे, जिनकी साधना और मानव कल्याण की भावना ने उन्हें जन-जन की आस्था का केंद्र बनाया।
रामगढ़ की पावन धरती पर जन्मे बाबा कीनाराम के जीवन में बचपन से ही आध्यात्मिक चेतना के संकेत दिखाई देने लगे थे। सांसारिक मोह-माया से उनका मन धीरे-धीरे विरक्त होता गया और वह साधना की ओर अग्रसर हुए। आगे चलकर देश के विभिन्न क्षेत्रों की यात्रा करते हुए उन्होंने कठोर साधना की और सिद्ध संत के रूप में प्रतिष्ठा प्राप्त की।
जूनागढ़ की चक्कियों से लेकर जीवन रक्षा तक, चमत्कारों की अनगिनत कथाएं
बाबा कीनाराम के जीवन से जुड़ी अनेक चमत्कारिक कथाएं आज भी श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित हैं। जनश्रुतियों के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता से लेकर असंभव प्रतीत होने वाली परिस्थितियों को बदल देने तक बाबा की सिद्धियों के अनेक प्रसंग सुनने को मिलते हैं।
जूनागढ़ से जुड़ी प्रसिद्ध कथा के अनुसार बाबा के शिष्य बीजाराम को बंदी बनाए जाने के बाद उन्हें चक्की चलाने के लिए रखा गया। बाबा ने अपनी सिद्धि के प्रभाव से ऐसी स्थिति उत्पन्न कर दी कि वहां रखी अन्य चक्कियां भी अपने आप चलने लगीं। इस घटना से प्रभावित होकर तत्कालीन शासक ने बाबा से क्षमा मांगी और साधु-संतों के लिए अन्न की व्यवस्था का वचन दिया।
इसी प्रकार बाबा कीनाराम के जीवन से जुड़ी अन्य जनश्रुतियों में जरूरतमंदों को संकट से निकालने और मृतप्राय व्यक्ति को जीवन प्रदान करने जैसी कथाओं का भी उल्लेख मिलता है। भक्त इन घटनाओं को बाबा की सिद्धि और आध्यात्मिक शक्ति का प्रमाण मानते हैं।
गिरनार में मिला दत्तात्रेय का आशीर्वाद, काशी में स्थापित हुई साधना की परंपरा
बाबा कीनाराम की साधना यात्रा में गिरनार पर्वत का विशेष महत्व माना जाता है। जनश्रुतियों के अनुसार गिरनार में उन्हें भगवान दत्तात्रेय के दर्शन हुए। इसके बाद उनकी साधना यात्रा ने एक नई दिशा प्राप्त की।
बाद में काशी पहुंचकर उन्होंने अघोर साधना की परंपरा को और व्यापक स्वरूप दिया। काशी का क्रीं-कुंड, रामगढ़ सहित कई स्थान आज भी बाबा कीनाराम की साधना और परंपरा से जुड़े प्रमुख केंद्र माने जाते हैं।
बाबा कीनाराम की शिक्षाओं का मूल भाव मानव सेवा, करुणा, समानता और आध्यात्मिक चेतना से जुड़ा रहा। यही कारण है कि सदियों बाद भी उनकी जन्मस्थली रामगढ़ में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है।
बाबा की जन्मस्थली आज भी आस्था का प्रमुख केंद्र
रामगढ़ में बाबा कीनाराम का जन्मोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उनके जीवन, साधना और मानव कल्याण के संदेश को स्मरण करने का अवसर भी है। बाबा के प्रति लोगों की आस्था का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जन्मोत्सव के दौरान दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु रामगढ़ पहुंचकर उनके चरणों में शीश नवाते हैं।
बाबा कीनाराम से जुड़ी चमत्कारों की कथाएं आज भी भक्तों की आस्था को मजबूती देती हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा की कृपा से उनके जीवन के संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क चिकित्सा और भोजन की व्यवस्था
जन्मोत्सव में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निःशुल्क चिकित्सा सेवा भी उपलब्ध रही। प्रभारी चिकित्साधिकारी चहनियां संदीप के नेतृत्व में चिकित्सा दल ने श्रद्धालुओं, कर्मचारियों एवं अन्य लोगों को आवश्यक उपचार और दवाएं उपलब्ध कराईं।
चिकित्सकों ने श्रद्धालुओं से स्वच्छ एवं उबला हुआ पानी पीने, खान-पान में सावधानी बरतने तथा स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने की अपील की।
सेवा, साधना और आस्था का केंद्र बना रामगढ़
427वें जन्मोत्सव के दूसरे दिन रामगढ़ में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर साबित किया कि बाबा कीनाराम के प्रति लोगों की श्रद्धा समय के साथ कम नहीं हुई, बल्कि निरंतर बढ़ती जा रही है। बाबा की जन्मस्थली और तपस्थली में गूंजते जयकारे, दर्शन के लिए लगी कतारें और श्रद्धालुओं की आस्था पूरे आयोजन को विशेष बना रही है।
बाबा कीनाराम की साधना, उनकी महिमा और उनसे जुड़ी चमत्कारों की जनश्रुतियां आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विश्वास का आधार बनी हुई हैं।
इस दौरान केंद्र व्यवस्थापक मेजर अशोक सिंह, अरुण सिंह, धनंजय सिंह, लल्ला सिंह, इंद्रेश कुमार, रूबी सिंह, धनंजय सिंह उर्फ धनजी, कुलदीप वर्मा, मिथिलेश सिंह, संतोष पटेल, अनिल पांडेय, बुज्जा पांडेय, दिनेश सोनकर, सुनील विश्वकर्मा, अशोक मौर्य, नंदू गुप्ता, संदीप पाटिल सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।




