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Monday, November 2, 2026
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Chandauli news- आज आधी रात जन्मेंगे कान्हा, जयकारों से गूंजेगा आंगन

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब, कान्हा के जयकारों से भक्तिमय हुआ वातावरण

परिवर्तन टुडे न्यूज, चंदौली। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पावन पर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आज पूरे देश में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। भगवान विष्णु के आठवें अवतार माने जाने वाले श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, उनके दिव्य स्वरूप और गीता के संदेश को स्मरण करते हुए श्रद्धालु उपवास, पूजन और भजन-कीर्तन में लीन हैं। मंदिरों से लेकर घरों तक कान्हा की भक्ति का रंग दिखाई दे रहा है।

घरों से मंदिरों तक सजी कान्हा की झांकी

जन्माष्टमी को लेकर श्रद्धालुओं ने अपने घरों और मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया है। कहीं फूलों से मनमोहक सजावट की गई है तो कहीं बाल गोपाल की सुंदर झांकियां सजाई गई हैं। नन्हे-मुन्ने बच्चों को कृष्ण और राधा के स्वरूप में सजाकर परिवारों ने पर्व की खुशियां साझा कीं।

मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का क्रम शुरू हो गया। भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन के लिए भक्तों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। मंदिर परिसर ‘राधे-राधे’, ‘जय श्रीकृष्ण’ और ‘नंद के घर आनंद भयो’ के जयघोष से गूंजते रहे।

मध्यरात्रि में होगा कान्हा का जन्मोत्सव

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय हुआ था। इसी मान्यता के अनुरूप श्रद्धालु रात्रि में भगवान के जन्म का उत्सव मनाते हैं।

मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का विधिवत पूजन कर उन्हें पंचामृत से स्नान कराया जाएगा। इसके बाद नए वस्त्र और आभूषण पहनाकर पालने में विराजमान कराया जाएगा। भक्त भगवान को माखन, मिश्री, धनिया पंजीरी, फल और विभिन्न प्रकार के मिष्ठान अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।

उपवास और भजन-कीर्तन में लीन रहे श्रद्धालु

जन्माष्टमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपवास रखा। दिनभर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना और भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा। महिलाओं ने घरों में भगवान की पूजा-अर्चना कर बाल गोपाल को भोग लगाया।

कई स्थानों पर धार्मिक अनुष्ठान, संकीर्तन और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं में पर्व को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

श्रीकृष्ण का संदेश आज भी प्रासंगिक

श्रीकृष्ण केवल आस्था के केंद्र ही नहीं, बल्कि जीवन दर्शन के महान मार्गदर्शक भी हैं। कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में अर्जुन को दिया गया उनका गीता का उपदेश आज भी मानव जीवन को कर्म, कर्तव्य और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

भगवान श्रीकृष्ण ने निष्काम कर्म का संदेश देते हुए बताया कि मनुष्य को अपने कर्तव्य का पालन करते रहना चाहिए और परिणाम की चिंता से स्वयं को मुक्त रखना चाहिए। उनका जीवन अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, धर्म की स्थापना और सत्य की विजय का संदेश देता है।

प्रेम, करुणा और धर्म की राह दिखाता है पर्व

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल उत्सव का पर्व नहीं, बल्कि जीवन में प्रेम, करुणा, संयम और धर्म के मूल्यों को आत्मसात करने का अवसर भी है। श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं जहां जीवन में आनंद और सरलता का संदेश देती हैं, वहीं उनका कर्मयोग मनुष्य को कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और कर्तव्य के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि हम श्रीकृष्ण के संदेश को केवल पूजा और उत्सव तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने जीवन और व्यवहार में भी उतारें।

‘जय कन्हैया लाल की’ से गूंजेगा वातावरण

रात्रि में जैसे ही श्रीकृष्ण जन्म का शुभ क्षण आएगा, मंदिरों और घरों में घंटा-घड़ियाल की ध्वनि के साथ ‘जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे गूंज उठेंगे। श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का दर्शन कर स्वयं को धन्य मानेंगे।

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.
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