डैडीज़ इंटरनेशनल स्कूल में शिक्षक दिवस पर शिक्षा के उद्देश्य और शिक्षक की भूमिका पर हुआ सार्थक विमर्श
परिवर्तन टुडे न्यूज, चंदौली। डैडीज़ इंटरनेशनल स्कूल एंड हॉस्टल में शिक्षक दिवस उत्साह, आत्मीयता और गरिमापूर्ण वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम और परीक्षा तक सीमित रखने के बजाय बच्चों में सीखने की क्षमता, जिज्ञासा, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा मानवीय संवेदना विकसित करने पर विशेष जोर दिया।
डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल बच्चों को जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें स्वयं सीखने और सोचने के योग्य बनाना है। उन्होंने कहा, “हम बच्चों को क्या पढ़ा रहे हैं, इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि हम उन्हें सीखना कैसे है, यह सिखा रहे हैं या नहीं।”
उन्होंने कहा कि यदि बच्चा सवाल करना, विषय को समझना और स्वयं उत्तर तलाशना सीख जाता है तो उसके भीतर जीवनभर सीखते रहने की क्षमता विकसित हो जाती है। पाठ्यक्रम और विषय समय के साथ बदल सकते हैं, लेकिन सीखने की क्षमता जीवनभर बच्चे के साथ रहती है।
शिक्षा के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व की समझ भी जरूरी
डॉ. तिवारी ने कहा कि बेहतर समाज के निर्माण के लिए बच्चों को सामाजिक उत्तरदायित्व का बोध कराना अत्यंत आवश्यक है। हर जिम्मेदारी सरकार पर छोड़ देना उचित नहीं है। समाज हमारा है तो उसे बेहतर बनाने की जिम्मेदारी भी हमारी है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को एक-दूसरे का सम्मान करना, सहयोग की भावना रखना तथा मानव जीवन के महत्व को समझना सिखाना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विद्यालय से निकलने वाला विद्यार्थी केवल ज्ञानवान ही नहीं, बल्कि संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक भी होना चाहिए।
शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने वाला नहीं, मार्गदर्शक भी है
डॉ. तिवारी ने शिक्षकों से स्वयं भी निरंतर सीखते और समय के साथ बदलते रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बदलती दुनिया में शिक्षक की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं रह गई है। शिक्षक बच्चे के भीतर जिज्ञासा, प्रश्न करने की क्षमता और स्वतंत्र सोच विकसित करने वाला मार्गदर्शक है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य एमडी अजय श्रीवास्तव ने कहा कि अच्छे शिक्षक की पहचान केवल इस बात से नहीं होती कि उसके विद्यार्थी कितना जानते हैं, बल्कि इस बात से होती है कि उसने उनके भीतर सीखने की कितनी जिज्ञासा पैदा की है। उन्होंने कहा कि शिक्षक के लिए इससे बड़ा पुरस्कार कुछ नहीं हो सकता कि उसका विद्यार्थी आगे चलकर उससे भी आगे बढ़े।
शिक्षकों ने साझा किए अपने अनुभव
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भी शिक्षक होने के अपने अनुभव साझा किए। किसी शिक्षक ने गुरु को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला मार्गदर्शक बताया तो किसी ने कहा कि विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे समय के साथ अपने बच्चों की तरह प्रिय हो जाते हैं।
एक शिक्षक ने अपने पिता को अपना पहला शिक्षक बताते हुए उनके जीवन से मिली सीख को साझा किया। वहीं एक अन्य शिक्षक ने कहा कि अपने विषय को बच्चों की नजर में महत्वपूर्ण और रोचक बना देना ही शिक्षण की वास्तविक कला है।
उन्होंने कहा कि जब बच्चा परीक्षा के भय से नहीं, बल्कि किसी विषय को जानने और समझने की इच्छा से पढ़ने लगे, तभी शिक्षक का प्रयास वास्तव में सार्थक माना जा सकता है।
अच्छे विद्यार्थी के साथ अच्छा इंसान बनाना भी लक्ष्य
डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने कहा कि विद्यालय की सफलता का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कि यहां से कितने डॉक्टर, अभियंता, अधिकारी अथवा सफल व्यवसायी निकले। वास्तविक सफलता तब होगी, जब विद्यालय से निकलने वाले बच्चे जिम्मेदार, संवेदनशील और अच्छे इंसान बनें।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल बच्चे का भविष्य बनाना नहीं, बल्कि ऐसे मनुष्य का निर्माण करना है जो आगे चलकर समाज और देश के भविष्य को बेहतर बनाने में अपना योगदान दे सके।
कार्यक्रम में जिशान, तेजस्विनी, शालिनी, प्रज्ञा, विनायक, विनीत सहित विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। आत्मीय वातावरण में आयोजित शिक्षक दिवस कार्यक्रम इसी संदेश के साथ संपन्न हुआ कि सच्ची शिक्षा वही है, जो ज्ञान के साथ जिज्ञासा, संस्कार के साथ संवेदना और सफलता के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना पैदा करे।


