परिवर्तन टुडे डेस्क
चंदौली। सकलडीहा पीजी कॉलेज मे बुद्धवार को समाजशास्त्र विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वर्तमान समय में समाजशास्त्र विषय की बढ़ती प्रासंगिकता तथा बदलते सामाजिक परिवेश में मनुष्य और समाज के बीच कमजोर होते संबंधों पर गंभीर विमर्श करना था।
गोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रो. दयाशंकर सिंह यादव ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक समय में सामाजिक संबंधों में निरंतर दरार आ रही है, जिसके कारण अनेक प्रकार की सामाजिक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि समाजशास्त्र न केवल इन समस्याओं को समझने का माध्यम है, बल्कि समाज को पुनः जोड़ने और सामाजिक समरसता स्थापित करने का एक सशक्त उपकरण भी है।
उन्होंने आगे कहा कि व्यक्तिवाद के बढ़ते प्रभाव के चलते सामाजिक बंधन कमजोर हो रहे हैं, ऐसे में समाजशास्त्र की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। यह विषय हमें सामाजिक मूल्यों, परंपराओं और मानवीय संबंधों की गहराई को समझने की दृष्टि प्रदान करता है तथा समाज में सहयोग, सहिष्णुता और एकता को मजबूत करता है।
कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने भी समाजशास्त्र की उपयोगिता, सामाजिक एकजुटता और नैतिक मूल्यों के संरक्षण पर अपने विचार व्यक्त किए। गोष्ठी में प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं की अत्यधिक संख्या में उपस्थिति रही, जिससे कार्यक्रम अत्यंत सफल एवं सार्थक सिद्ध हुआ।
अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम में अत्यधिक संख्या में छात्र-छात्राओं तथा अध्यापक उपस्थित रहे, संचालन डॉ. प्रीतम उपाध्याय ने किया।







