पहले सप्ताह में बच्चों को परोसा गया गरमा-गरम सूजी का हलवा, पोषण स्तर सुधारने के लिए विभाग की पहल
समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण वितरण सुनिश्चित करने के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी : सचिन कुमार
परिवर्तन टुडे न्यूज, चंदौली। परिषदीय एवं माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री पोषण योजना के अंतर्गत जनपद में विशेष पोषण अभियान की शुरुआत की गई है। इसके तहत जिले के 1267 आच्छादित विद्यालयों में बच्चों को अतिरिक्त पोषक आहार के रूप में सूजी से निर्मित मीठा हलवा और नमकीन उपमा वितरित किया जा रहा है। नवंबर माह के प्रथम सप्ताह से शुरू हुई इस पहल को लेकर विद्यालयों में बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

14 सप्ताह तक चलेगा विशेष पोषण कार्यक्रम
योजना के पहले सप्ताह के शुक्रवार को जनपद के सभी आच्छादित विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को गरमा-गरम और स्वादिष्ट सूजी का हलवा परोसा गया। पौष्टिक हलवा पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे। विभाग की ओर से यह विशेष कार्यक्रम नवंबर 2026 से लगातार 14 सप्ताह तक संचालित किया जाएगा, जो फरवरी 2027 के तीसरे सप्ताह तक चलेगा।
सप्ताहवार निर्धारित किया गया पौष्टिक आहार
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिन कुमार ने बताया कि बच्चों को स्वाद और पौष्टिकता का ध्यान रखते हुए अलग-अलग सप्ताह में विविध आहार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके तहत प्रथम एवं तृतीय सप्ताह में सूजी का मीठा हलवा तथा द्वितीय, चतुर्थ एवं पंचम सप्ताह में सूजी का नमकीन उपमा वितरित किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों को नियमित भोजन के साथ अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराना है।
शत-प्रतिशत क्रियान्वयन के दिए गए निर्देश
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि योजना के सुचारु, पारदर्शी और समयबद्ध संचालन के लिए कार्यालय की ओर से 14 अक्टूबर और 30 अक्टूबर 2026 को जारी पत्रों के माध्यम से सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने विकासखंड के विद्यालयों में शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
बच्चों के स्वास्थ्य के साथ उपस्थिति बढ़ाने पर जोर
सचिन कुमार ने कहा कि यह पहल बच्चों के स्वास्थ्य, शारीरिक विकास और पोषण स्तर में सुधार लाने के साथ ही विद्यालयों में उनकी उपस्थिति एवं पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाने में भी सहायक होगी। विभाग की प्राथमिकता है कि प्रत्येक बच्चे को स्वच्छ वातावरण में गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को नियमित निगरानी और व्यवस्था का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।



