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Tuesday, August 25, 2026
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बढ़ती फीस ने तोड़ी अभिभावकों की कमर, निजी स्कूलों पर लगाम कब?

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.

परिवर्तन टुडे डेस्क
चंदौली। नया शैक्षिक सत्र शुरू होते ही अभिभावकों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। बच्चों की पढ़ाई का खर्च हर साल इतना बढ़ जाता है कि आम आदमी के लिए इसे संभालना मुश्किल हो जाता है। सीमित आय और बढ़ते खर्चों के बीच अभिभावक अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए हर संभव प्रयास करते हैं, चाहे इसके लिए उन्हें कर्ज लेना पड़े या अपनी जरूरतों में कटौती करनी पड़े।

निजी स्कूलों की फीस में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने मध्यमवर्ग और गरीब परिवारों की कमर तोड़ दी है। फीस के साथ-साथ डेवलपमेंट चार्ज, वार्षिक शुल्क और अन्य मदों में ली जाने वाली रकम अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। स्थिति यह है कि कई स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक की किताबों का सेट ही हजारों रुपये में मिल रहा है, जिससे अभिभावकों के पसीने छूट जाते हैं।

इतना ही नहीं, कई स्कूलों द्वारा निर्धारित दुकानों से ही किताबें और कॉपियां खरीदने का दबाव भी बनाया जाता है। इन दुकानों पर महंगे दामों पर सामग्री बेची जाती है, जिससे अभिभावकों को मजबूरी में अधिक खर्च करना पड़ता है। इन दिनों पुस्तक विक्रेताओं की दुकानों पर लंबी कतारें इसका साफ संकेत हैं कि अभिभावक किस तरह इस व्यवस्था से जूझ रहे हैं।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस पूरे मामले में प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती। वर्षों से निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण के लिए कानून बनाए जाने की बात कही जाती रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

अगर समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो शिक्षा आम आदमी की पहुंच से दूर होती जाएगी। इससे न केवल बच्चों का भविष्य प्रभावित होगा, बल्कि समाज में असमानता भी बढ़ेगी।

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.
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