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Thursday, October 29, 2026
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Chandauli news- शिव पार्वती विवाह में उमड़ा भक्तों का जन सैलाब, हर-हर महादेव के उद्घोष से गूजांयमान हुआ पंडाल

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.

परिवर्तन टुडे चन्दौली
Story By- मनोज कुमार मिश्रा
चहनियां। विकास खंड क्षेत्र के भलेहटा गांव में सात द्विवसीय श्री शिवपुराण महाकथा के चैथे दिन बृहस्पतिवार को कथा वाचक सत्यनारायण स्वामी महाराज ने अपने मधुर वचनों से भगवान शिव व माता पार्वती के विवाह की कथा का मनोरम वर्णन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। चारो तरफ हर-हर महादेव के उद्घोष से पूरा पंडाल गूजांयमान हो गया।

वही स्वामी जी ने शिव महापुराण कथा रूपी अमृत को श्र्रोताओं में अपने मधुरवाणी से छिड़कते हुए कहा कि शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग भक्ति, त्याग, साथ ही संपूर्ण ब्रह्मांड में संतुलन का प्रतीक है। जब माता सती ने महाराज दक्ष के यज्ञ में कूदकर दक्ष प्रजाति का यज्ञ विध्वस कर राख हो गयी। उसके पश्चात भगवान शिव गहन समाधि में लीन हो गए थे। दुसरी तरफ पृथ्वी का संतुलन धीरे-धीरे बिगड़ने लगा असुरों का आंतक बढ़ने लगा चारो तरफ त्राहीमाम की दशा हो गयी। तब माता सती ने ही हिमालयराज और मैना के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया और वे भगवान शिव को पाने के घोर तपस्या करने लगी। तब भगवान भोलेनाथ उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर अंततः उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया और देवताओं के आग्रह पर विवाह करने को राजी हो गये।

शिव की अनोखी बारात का जब समय आया, तो भगवान शिव की बारात में एक विचित्र और अद्भुत दृश्य देखने को मिला। बारातियों में सभी देवी-देवताओं के साथ-साथ भूत, पिशाच, यक्ष, गंधर्व, और सभी प्रकार के जीव-जंतु शामिल थे। स्वयं भगवान शिव भस्म लगाए, नंदी पर सवार होकर और गले में सर्प की माला पहने हुए बारात में शामिल हुए। इनके इस स्वरूप को देखकर माता मैना अति भयभीत होकर बेहोश हो गयी कि यह वर मेरी पुत्री योग्य नही है। इसेस में अपनी लाडली का विवाह नही होने दूगी तब पार्वती जी ने अपने अन्र्तआत्मा से भगवान को याद कर उस स्वरूप को बदलने की इच्छा जाहीर जिस पर भगवान भोलेनाथ उनकी बातों स्वकार आम आदमी दुल्हे तरह सज गये और जब माता मैना ने अपनी आँख को खेाला तो एक सुन्दर व सुयोग्य वर देकर प्रसन्न हो गयी और उनका परछन इत्यादि का कार्य प्रारम्भ कर दिया।

जब विवाह करने के लिए मंडप में भगवान विष्णु ने माता पार्वती का कन्यादान किया और ब्रह्मा जी ने विवाह के मंत्र पढ़े। अग्नि को साक्षी मानकर शिव और पार्वती ने विवाह के पवित्र सात फेरे लिए। इस दिव्य मिलन से ब्रह्मांड में ऊर्जा और संतुलन स्थापित हुआ। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि प्रेम केवल शारीरिक सुंदरता का मोह नहीं, बल्कि तपस्या, समर्पण और धैर्य का परिणाम है। आज के समाज पर स्वामी ने उनको सचेत व जागरूक करते हुए कहा कि विवाह कोई खिलवाड़ नही है विवाह का मतलब पति पत्नी के जीवन में अनेको प्रकार के उतार चढ़ाव के समय आते उन समयांे में दोनों का एक रथ के दो चक्के तरह साहस, धैर्य, समर्पण की तरह खीचकर उसके जीवन रूपी सड़क के किनोर लगाकर अपने गनतब्य तक पहुचना चाहिए।

कथा कहानी नही होती है बल्कि उसे जीव को आत्मसात करने की आवश्यकता है। तभी पृथ्वी का संतुलन बना रहेगा। अन्यथा चारो तरफ भयावह स्थिती हो जायेगी। जिसे रोक पाना सम्भव नही हो पायेगा और अंत समय में प्रलय हो जायेगा। वही कथा प्रेमियों माता पार्वती भगवान भोलेनाथ के विवाह में अपनी शक्ति के अनुसार अन्न वस्त्र व अर्थ का दान कर पुण्य के भागी बनें चारों तरफ हर-हर महादेव, हर-हर महादेव के उद्घेाष से पूरा वातवारण शिवमय होता जा रहा था और धीमें-धीमें साम ढ़लती गयी वैसे-वैसे लग रहा कि मानों देवता भी शिवमहापुराण कथा के दौरान शिव विवाह में सम्मिलित होकर शितलता प्रदान कर हो। कथा अंत में भगवान शिव माता पार्वती का भव्य एंव दिव्य आरती उतारी गयी।

इस दौरान उपेन्द्र मिश्रा, राजेन्द्र प्रताप सिंह, मुन्ना सिंह, राजेन्द्र सिंह, पारसनाथ पाठक तबला वादक, जगत नारायण पांडे कैसीओ बादक व ढ़ोलक शशिनाथ पांडे व आचार्य अभय उपाध्याय सहित सैकड़ों श्रोता मौजूद रहे।

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.
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