परिवर्तन टुडे चन्दौली
सकलडीहा। विकास खंड क्षेत्र के सहरोई गांव में श्री हनुमान जयंती के पावन अवसर पर नवयुवक मंगल दल सहरोई के तत्वाधान में सात दिवसीय संगीतमय रामकथा का आयोजन किया गया है।
कथा के तीसरे पंडित शक्ति तिवारी ने कथा में बताया कि जब राक्षसों का आंतक पूरे चरम सीमा था तब साधु, संत अपने यज्ञ अनुष्ठान को पूरा नही कर पाते तब लोकल्याण की कामना कर विश्वामित्र जी ने महाराज दशरथ के पास पहुचे और उनसे उन्होने उनके परम प्रिय पुत्र राम व लक्षमण को ले जाने की बात करने लगे।
जिस पर महाराज दशरथ हिचकिचाने लगे तब विश्वामित्र जी ने कहा हे राजन यह दोनों पुत्र साधारण नहीं है, और आप पुत्र मोह को त्याग कर राम लक्ष्मण को हमारे साथ चलने की आज्ञा दीजिए तभी राक्षसों का अंत हो पाएगा। और लोककल्याण संम्भव हो पायेगा। जिस पर महाराज दशरथ ने राम व लक्षमण को उनके साथ जाने की अनुमति दे दी। जब विश्वामित्रजी राम और लक्षमण को लेकर बक्सर में पहुचे और विश्वामित्र जी के यज्ञ को पूर्ण कराये और यज्ञ में बाधा उत्पन्न करने वाले राक्षसों का अंत कर दिया।
उसके उपरान्त नियति व विधी के खेल को देखते हुए गुरू विश्वामित्र ने जनकपुर में पहुचे जहा महाराज जनक जी द्वारा स्थापित सीता स्वंयर नामक यज्ञ को देखने की इच्छा सें पहुचे लेकिन वह भी अधूरा सावित हो गया तब जनक जी निराश भाव से पूरे सभा पर व्यंग कसने लगे तभी लक्षमण जी क्रोधित हो उठे। जिस पर विश्वामित्र जी ने लक्षमण जी को शान्त करवाया सीतास्वयंर नामक यज्ञ को पूर्ण करने हेतु श्रीराम को आदेशित किया जब प्रभु श्रीराम ने धुनष को सर्हष भाव में उठाते हुए तमंचा चढ़ाने की कोशिस की कि धनुष टूट गया और महाराज जनकी जी का सीता स्वयंबर नामक यज्ञ पूर्ण हो गया। धनुष भंग होते ही चारो तरफ हर-हर महादेव के नारे से पूरा पांडाल गुजयमान हो उठा। वही श्रोता गगन भेदी जयकारे लगाने लगे। इस दौरान सैकड़ों लोगों का जन सैलाब उमड़ा रहा।
वहीं उपस्थित सुमन तिवारी, संजय पांडे, राहुल मिश्रा समाजसेवी, अमित मिश्रा, रोहित, पवन, शिशु, विराट, उमेश, महानंद, दिनेश, शुभम, गोलू, तबला वादक अनिल तिवारी सैकड़ो श्रद्धालु उपस्थित रहे।



