विश्व फोटोग्राफी दिवस पर न्यू बनारस कैमरा सोसाइटी का भव्य आयोजन, काशी सहित पूर्वांचल के सैकड़ों छायाकार हुए शामिल
परिवर्तन टुडे न्यूज़, वाराणसी। विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर बुधवार को रामकटोरा स्थित श्री अन्नपूर्णा बैंक्वेट में न्यू बनारस कैमरा सोसाइटी (एनबीसीएस) की ओर से भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में काशी सहित पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों से बड़ी संख्या में छायाकार एवं वीडियोग्राफर शामिल हुए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एनबीसीएस के संरक्षक डॉ. विनय प्रकाश तिवारी रहे।

स्व. रवि पाण्डेय को श्रद्धांजलि से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के संस्थापक स्व. रवि पाण्डेय के छायाचित्र पर मुख्य अतिथि डॉ. विनय प्रकाश तिवारी द्वारा पुष्प अर्पित कर किया गया। इस दौरान पूरा परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।
डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने फोटोग्राफरों के कार्य को केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज की स्मृतियों और इतिहास को सहेजने वाली महत्वपूर्ण कला बताया। उन्होंने कहा कि फोटोग्राफर केवल तस्वीर नहीं खींचता, बल्कि समय को एक पल के लिए रोक देता है। आज जो तस्वीर सामान्य दिखाई देती है, संभव है कि बीस वर्ष बाद वही जीवन की सबसे अनमोल स्मृति बन जाए।
उन्होंने कहा कि विवाह, पारिवारिक उत्सव अथवा समाज के किसी ऐतिहासिक क्षण को आने वाली पीढ़ियों तक जीवंत रखने का कार्य फोटोग्राफर करता है। समय जिन पलों को अपने साथ आगे ले जाता है, फोटोग्राफर उन्हें तस्वीरों के माध्यम से हमेशा के लिए सुरक्षित कर देता है।
आपकी जिंदगी का सबसे बेहतरीन चित्र अभी बाकी हो सकता है
युवा फोटोग्राफरों का उत्साह बढ़ाते हुए डॉ. तिवारी ने विश्व प्रसिद्ध फोटोग्राफर स्टीव मैककरी और उनकी चर्चित ‘अफगान गर्ल’ तस्वीर का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कभी-कभी सामान्य दिखाई देने वाला कोई क्षण भी पूरी दुनिया में पहचान दिलाने वाला बन जाता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य को छोटा नहीं समझना चाहिए और सामान्य दिखाई देने वाले किसी क्षण को भी मामूली नहीं मानना चाहिए। दुनिया के लिए वह सामान्य दिन हो सकता है, लेकिन एक फोटोग्राफर के लिए वही दिन इतिहास बन सकता है। उन्होंने कहा कि संभव है कि किसी फोटोग्राफर का जीवन का सबसे बेहतरीन चित्र अभी खिंचा ही न हो और अगला चित्र ही उसकी पहचान बन जाए।
सही क्षण की पहचान ही छायाकार की सबसे बड़ी ताकत
डॉ. तिवारी ने महान फोटोग्राफर हेनरी कार्तिए-ब्रेसों के ‘निर्णायक क्षण’ के विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि फोटोग्राफी जीवन जीने का भी बड़ा संदेश देती है। अवसर सामने आकर यह नहीं बताता कि वह अवसर है। सही समय पर सही क्षण को पहचान लेना ही फोटोग्राफर की सबसे बड़ी ताकत है। इसी प्रकार जीवन में भी जो व्यक्ति सही समय पर अवसर को पहचान लेता है, वह सफलता की दिशा में बहुत आगे निकल सकता है।
एआई से डरने के बजाय उसे बनाएं अपनी ताकत
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव पर डॉ. तिवारी ने फोटोग्राफरों से तकनीक से डरने के बजाय उसे सीखने और अपनी क्षमता बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि फिल्म कैमरे से डिजिटल कैमरा आया, उसके बाद स्मार्टफोन ने फोटोग्राफी को आम लोगों तक पहुंचाया। प्रत्येक तकनीकी बदलाव के समय इस व्यवसाय के भविष्य को लेकर सवाल उठे, लेकिन फोटोग्राफी समाप्त नहीं हुई, बल्कि उसका स्वरूप लगातार बदलता गया।
उन्होंने कहा कि एआई फोटोग्राफर को समाप्त नहीं करेगा, लेकिन एआई का बेहतर उपयोग करने वाला फोटोग्राफर निश्चित रूप से उस फोटोग्राफर से आगे निकल सकता है, जो नई तकनीक से अनजान है। इसलिए तकनीक से संघर्ष करने के बजाय उसे अपनी ताकत बनाना होगा।
उन्होंने युवाओं से एआई, आधुनिक छायांकन, नई संपादन तकनीक, ड्रोन, सिनेमाई वीडियोग्राफी और डिजिटल विपणन का ज्ञान प्राप्त करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महंगा कैमरा किसी को बड़ा फोटोग्राफर नहीं बनाता, बल्कि बड़ी और संवेदनशील दृष्टि ही किसी छायाकार को विशिष्ट बनाती है।
एनबीसीएस के संरक्षक का दायित्व मेरे लिए जिम्मेदारी : डॉ. तिवारी
एनबीसीएस के संरक्षक डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने कहा कि संस्था से उनका जुड़ाव केवल औपचारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि संरक्षक होने का अर्थ केवल किसी बैनर पर नाम लिखा होना नहीं है। फोटोग्राफरों और वीडियोग्राफरों के हित, सम्मान, तकनीकी विकास और भविष्य से जुड़े विषयों पर वह एनबीसीएस परिवार के साथ खड़े रहेंगे।
उन्होंने एनबीसीएस को भविष्य में फोटोग्राफरों के प्रशिक्षण, नई तकनीक, एआई, व्यवसाय और विपणन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने का मजबूत मंच बनाने पर जोर दिया। साथ ही फोटोग्राफरों के लिए बीमा, आपातकालीन सहायता और उनके परिवारों के हित में योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने की आवश्यकता बताई।
दूसरों की यादें सहेजते हैं, अब अपने परिवार के साथ भी तस्वीर खिंचवाएं
डॉ. तिवारी ने फोटोग्राफरों को भावुक संदेश देते हुए कहा कि वे जीवनभर दूसरों की शादियों, बच्चों, माता-पिता और खुशियों की तस्वीरें खींचते हैं। उन्होंने कहा कि घर जाकर अपने माता-पिता, पत्नी और बच्चों के साथ भी एक तस्वीर अवश्य खिंचवाएं। इस बार कैमरा किसी दूसरे व्यक्ति को देकर स्वयं भी उस तस्वीर का हिस्सा बनें, क्योंकि दूसरों की यादें सहेजते-सहेजते ऐसा न हो कि वे अपने ही परिवार की यादों में कम दिखाई दें।
फोटो प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ छायाकार बिनय रावल ने की। उन्होंने फोटोग्राफी के विभिन्न पहलुओं पर संवाद किया। इसके बाद डॉ. विनय प्रकाश तिवारी एवं के.के. वाजपेयी ने फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में वन्यजीव, प्राकृतिक दृश्य, व्यक्तिचित्र, जनजीवन और वैवाहिक छायांकन से जुड़ी तस्वीरें विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।
संस्था की गतिविधियों का प्रस्तुत किया वार्षिक प्रतिवेदन
एनबीसीएस अध्यक्ष रंजन गौड़ ने सदस्यों का स्वागत करते हुए संगठन की मजबूती और एकजुटता पर जोर दिया। सचिव एवं वरिष्ठ छायाकार अजय पाण्डेय ने संस्था का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने वर्षभर की गतिविधियों के साथ विश्व फोटोग्राफी दिवस के इतिहास की भी जानकारी दी।
वरिष्ठ छायाकार रत्नाकर अवस्थी को मिला जीवनगौरव सम्मान
इस अवसर पर वाराणसी के वरिष्ठ छायाकार रत्नाकर अवस्थी को फोटोग्राफी के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए जीवनगौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। वहीं वैवाहिक छायाचित्र प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में श्रेष्ठ छायाकारों को क्रमशः 1500, 1000 और 500 रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। अन्य प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार देकर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
कार्यक्रम के अंत में संस्था के कोषाध्यक्ष अरविंद सिंह ने सभी अतिथियों, पदाधिकारियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से बिनय रावल, अरविंद सिंह, अजय पाण्डेय, सूर्यकांत, आदेश श्रीवास्तव, रंजन गौड़, प्रिंस सिंह, राजेश सिंह, अमित राज, अभय श्रीवास्तव, प्रिंस बरनवाल एवं सतीश सहित काशी और पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों से बड़ी संख्या में फोटोग्राफर एवं वीडियोग्राफर मौजूद रहे।


