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Tuesday, September 22, 2026
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Chandauli news- 2047 का भारत कैसा होगा? सकलडीहा पीजी कॉलेज में देश-विदेश के विद्वानों ने किया व्यापक मंथन

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.

सकलडीहा पीजी कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक सरोकारों पर हुआ गंभीर विमर्श

परिवर्तन टुडे न्यूज, चन्दौली
सकलडीहा। पीजी कॉलेज में समाजशास्त्र विभाग एवं पार्श्वनाथ विद्यापीठ वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन मंगलवार को विकसित भारत के निर्माण से जुड़े विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक पहलुओं पर देश-विदेश से आए विद्वानों ने व्यापक विचार-विमर्श किया। ‘विकसित भारत @ 2047 : चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय सत्रों में वक्ताओं ने भारत की विकास यात्रा की चुनौतियों के साथ संभावनाओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।

आर्थिक समृद्धि के साथ सामाजिक न्याय और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर

विभिन्न सत्रों में प्रो. कामना सिंह, राजनीति विज्ञान, राजकीय महाविद्यालय सैदपुर, प्रो. कुमुद सिंह, समाजशास्त्र, अग्रसेन पीजी कॉलेज वाराणसी, प्रो. आर. पी. एस. सिंह, समाजशास्त्र, महात्मा गांधी विद्यापीठ, प्रो. सत्य प्रकाश, कुशीनगर, डॉ. कुशकुलदीप, प्रो. रजनीश कुंवर, प्राचार्य हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज वाराणसी, डॉ. विश्वनाथ वर्मा, डॉ. अरविंद कुमार, डॉ. शिवसहाय यादव, डॉ. दुष्यंत यादव, डॉ. राम विलास, प्रो. अजय कुमार सिंह, बीएड, बीएचयू, डॉ. प्रियंका पाण्डेय, आरा तथा डॉ. विनोद कुमार यादव, अरुणाचल विश्वविद्यालय सहित विभिन्न विद्वानों एवं वक्ताओं ने अपने विचार प्रस्तुत किए।

वक्ताओं ने कहा कि विकसित भारत @ 2047 का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है। देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए सामाजिक न्याय, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती, तकनीकी प्रगति, रोजगार के अवसर, ग्रामीण विकास तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को समान महत्व देना होगा। वक्ताओं ने भारत की विकास यात्रा में युवा शक्ति तथा उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

सामाजिक असमानता कम किए बिना विकसित भारत की परिकल्पना अधूरी

समापन सत्र में अध्यक्ष प्रो. रमाकांत त्रिपाठी, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी ने विकसित भारत के लक्ष्य को सामाजिक सहभागिता एवं समावेशी विकास से जोड़ते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षा और सामाजिक चेतना की महत्वपूर्ण भूमिका है।

विशिष्ट अतिथि प्रो. अरविंद जोशी, समाजशास्त्र विभाग, बीएचयू ने भारतीय समाज में हो रहे तीव्र परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए सामाजिक असमानताओं को कम करना तथा विकास के अवसरों को समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाना आवश्यक है।

मुख्य वक्ता दिव्यराज अमिय ने जर्मनी से पधारकर वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत की विकास यात्रा पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत के लोगों को भारत से सीखना होगा और आदिवासी जीवन से भी सीख लेने की आवश्यकता है। उन्होंने अकेलेपन और वृद्धावस्था को वैश्विक समस्या बताते हुए भारतीय प्रतिभा, युवा शक्ति एवं तकनीकी क्षमता को देश की महत्वपूर्ण ताकत बताया।

भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय पर बल

विशिष्ट अतिथि प्रो. जगदीश दीक्षित, पूर्व प्राचार्य, टी. डी. कॉलेज ने भारतीय ज्ञान परंपरा एवं आधुनिक शिक्षा के समन्वय को विकसित भारत के लिए आवश्यक बताया। वहीं प्रो. दिवाकर सिंह, प्राचार्य, मलिकपूरा पीजी कॉलेज, मलिकपूरा ने उच्च शिक्षा, शोध एवं नवाचार को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया।

संगोष्ठी के स्वागत वक्तव्य में सकलडीहा पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. प्रदीप कुमार पाण्डेय ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब शिक्षा, शोध, नवाचार एवं सामाजिक जिम्मेदारी को एक साथ आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्वानों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के अकादमिक आयोजन विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को व्यापक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विमर्श से जोड़ने का कार्य करते हैं।

शोधार्थियों और प्रतिभागियों ने भी रखा अपना पक्ष

संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में वक्ताओं के विचारों पर शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों ने भी संवाद किया। इस दौरान विषय से जुड़े विभिन्न पक्षों पर प्रश्नोत्तर एवं विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम के दौरान एसोसिएट प्रोफेसर अजय कुमार यादव के पुस्तकालय को ‘बेस्ट अवार्ड’ प्रदान किया गया।

संगोष्ठी के संयोजक प्रो. दयाशंकर यादव ने दो दिवसीय संगोष्ठी की रिपोर्ट प्रस्तुत की। संचालन डॉ. अजय यादव ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. दयानिधि सिंह यादव ने किया। संगोष्ठी के सह संयोजक डॉ. रजनीश गुप्ता एवं डॉ. अनामिका सिंह तथा सचिव डॉ. श्यामलाल यादव और डॉ. वंदना कुमारी ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।

दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में विकसित भारत की संकल्पना को लेकर हुए व्यापक विमर्श ने यह रेखांकित किया कि वर्ष 2047 तक भारत के विकास की दिशा केवल आर्थिक उपलब्धियों से तय नहीं होगी, बल्कि शिक्षा, सामाजिक समानता, युवा शक्ति, शोध, नवाचार, सांस्कृतिक चेतना और समावेशी विकास भी इसकी आधारशिला होंगे।

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रजनी कांत पाण्डेय
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मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.
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