मुगलसराय में छह माह से चल रहा था कथित फर्जी सहायता केंद्र, 19 मॉनिटर और 20 कंप्यूटर बरामद
परिवर्तन टुडे न्यूज, चन्दौली
मुगलसराय। कैलाशपुरी मोड़ स्थित एक भवन की तीसरी मंजिल पर संचालित कथित साइबर ठगी गिरोह का पुलिस और साइबर सेल ने पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में गिरोह के तार जापान से चीन होते हुए मुगलसराय तक जुड़े होने की बात सामने आई है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से 19 मॉनिटर, 20 सीपीयू, तीन लैपटॉप, छह मोबाइल फोन, राउटर तथा पांच कूटरचित आधार कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, एक आरोपित के दो बैंक खातों में मौजूद करीब नौ लाख रुपये की धनराशि को भी फ्रीज कराया गया है।
जापानी नागरिकों को तकनीकी सहायता के नाम पर बनाते थे निशाना
पुलिस के मुताबिक कैलाशपुरी मोड़ स्थित भवन की तीसरी मंजिल पर कथित रूप से करीब छह माह से फर्जी सहायता केंद्र संचालित किया जा रहा था। यहां गिरोह के सदस्य जापानी भाषा सीखकर इंटरनेट आधारित कॉल के माध्यम से जापान के नागरिकों से संपर्क करते थे। विशेष रूप से बुजुर्गों को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के नाम पर अपने जाल में फंसाने की बात सामने आई है।
जांच में आरोप है कि जब जापान में किसी व्यक्ति के कंप्यूटर, लैपटॉप या अन्य उपकरण में तकनीकी खराबी आती थी तो वह गूगल पर संबंधित सहायता केंद्र का नंबर खोजता था। इसी दौरान गिरोह द्वारा तैयार किए गए फर्जी सहायता केंद्र अथवा संपर्क नंबर सामने आते थे। पीड़ित को यह भ्रम होता था कि वह संबंधित कंपनी के वास्तविक सहायता केंद्र से संपर्क कर रहा है।
एक फर्जी आवेदन के जरिये तैयार किया जाल
पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार गिरोह ने फर्जी ग्राहक सहायता का एक आवेदन तैयार कर रखा था। इसके माध्यम से जापान के लोगों को तकनीकी समस्या दूर करने का भरोसा दिलाया जाता था। संपर्क होने के बाद आरोपित कथित तौर पर पीड़ित के उपकरण का दूरस्थ नियंत्रण हासिल कर लेते थे। इसके बाद बैंकिंग संबंधी जानकारी जुटाने और एक बार इस्तेमाल होने वाला पासवर्ड हासिल करने का प्रयास किया जाता था।
पुलिस का कहना है कि पासवर्ड हासिल होने के बाद पीड़ितों के बैंक खातों से धनराशि निकालकर दूसरे खातों में भेजी जाती थी। जांच में धनराशि के चीन स्थित बैंक खातों में स्थानांतरित किए जाने की बात भी सामने आई है। इसके बाद हवाला के माध्यम से रकम गिरोह के संचालकों तक पहुंचाए जाने की आशंका जताई गई है।
हर माह करोड़ों रुपये की ठगी का आरोप
प्रारंभिक पूछताछ और जांच में गिरोह पर हर महीने करीब 10 से 12 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने का आरोप सामने आया है। हालांकि इस रकम और पूरे नेटवर्क की वास्तविकता की पुष्टि पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ कर गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, बैंक खातों और विदेश में मौजूद संपर्कों की जानकारी जुटाने में लगी है।
मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस और साइबर सेल अब इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने में जुटी है। जांच का प्रमुख केंद्र गिरोह के कथित मास्टरमाइंड की पहचान और उसकी गिरफ्तारी है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि जापान और चीन में इस गिरोह से जुड़े लोग कौन हैं तथा साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को किन-किन माध्यमों से इधर-उधर किया जाता था।
गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के आधार पर पुलिस को गिरोह के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की भी साइबर विशेषज्ञों की मदद से जांच की जा रही है।


