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Thursday, March 19, 2026
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जामडीह गांव में जामेश्वर महादेव की स्वंय अवतरित डबल शिव लिंग: दर्शन से पूरी होती हैं मुरादें

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.

परिवर्तन टुडे डेस्क
चंदौली। जनपद के सकलडीहा विकास खंड क्षेत्र के जामडीह गांव में पौने दो सौ वर्ष से अधिक प्राचीन डबल शिवलिंग का जामेश्वर महादेव की मंदिर है। मान्यता है कि यहां पर मंगल कामना और मन्नत लेकर आने वाली हर लोगों की मुरादें पूरी होती हैं। सावन माह और महाशिवरात्रि व दिपावली के दूसरे दिन दर्शन पूजन के लिये महिलाओं का काफी भीड़ जुटती है। माना जाता है कि मंदिर पर महामृत्युंजय मंत्र का उच्चारण करने वालो की अकाल मृत्यु भी टल जाता है।

पौने दो सौ वर्ष गाजीपुर जनपद के सराय पोस्ता स्टीमर घाट निवासी सुखलाल अग्रहरी चंदौली अपने रिश्तेदार के घर से लौट रहे थे। ग्रामीणों के अनुसार जामडीह गांव में पीपल के पेड़ के नीचे एक स्वप्न में भगवान शिव का सुखलाल अग्रहरी को दर्शन प्राप्त हुआ था। सुखलाल अग्रहरी ने उसी पीपल के नीचे मंदिर स्थापना के लिये खोदाई शुरू कराया। वहां पर स्वंय अवतरित जोड़ा शिवलिंग दिखायी दिया। सुखलाल अग्रहरी ने भगवान भोलेनाथ पर आस्था रखते हुए मंदिर का स्थापना किया। मंदिर स्थापना के बाद उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। उनका पुत्र शिव प्रसाद अग्रहरी, भोला अग्रहरी, काशी प्रसाद अग्रहरी और लच्छु अग्रहरी परिजनों के साथ आज भी दर्शन पूजन के लिये आते है। ग्राम प्रधान बिहारी यादव ने बताया कि यहां पर दूर दराज और कई जिले की महिलायें दर्शन पूजन के लिये आती है। आस्था के साथ पूजा करने वाले कभी निराश नहीं होते है।

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