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Sunday, June 21, 2026

स्वंय भू कालेश्वर नाथ के दर्शन मात्र से टल जाता है अकाल मृत्यु

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.

परिवर्तन टुडे चन्दौली
सकलडीहा। चतुर्भुजपुर स्थित स्वंय भू कॉलेश्वर नाथ मंदिर का इतिहास करीब साढ़े चार सौ साल पुराना है। यह मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर से पूर्व का है। मान्यता है कि यहां पर दर्शन पूजन करने वालों की सभी मूरादे पूरी होती है और उनकी अकाल मृत्यु नहीं होती है।

सावन माह में महामृत्युंजय जाप और अंखड पूजन करने वालों की अकाल मृत्यु भी टल जाता है। सावन माह के दूसरे सोमवार को दर्शन पूजन के लिये शाम से भी भक्तों का भीड़ जुटने लगा है। मंदिर के अंदर और बाहर दर्शनार्थियों के लिये बैरियर से लेकर रबर पैड और शीतल जल की व्यवस्था किया गया है।

मंदिर के पीआरओ पीयूष तिवारी ने बताया कि मंदिर का इतिहास काशी विश्वनाथ मंदिर से भी पुराना है। मंदिर पर दर्शन पूजन के लिये समस्त व्यवस्था किया गया है।

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रजनी कांत पाण्डेय
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मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.
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