परिवर्तन टुडे डेस्क
चंदौली। ग्रामीण क्षेत्र में चुनावी हलचल राजनीति का पारा चढ़ चुका है। वर्ष 2026 में होने वाले ग्राम प्रधान चुनाव को लेकर गांव-गांव में चुनावी हलचल शुरू हो चुका है। गलियों, चौपालों और चाय की दुकानों पर एक ही चर्चा है-कौन बनेगा अगला प्रधान? इस बार मुकाबला सिर्फ पद का नहीं, बल्कि भरोसे, सेवा और वर्चस्व का है। दावेदारों की फौज मैदान में उत्तर चुकी है और हर उम्मीदवार यह साबित करने में जुटा है कि जिसके घर जितने वोट, उसकी उतनी सेवा। चुनावी माहौल में सबसे बड़ा हथियार बन गया है जनसंपर्क। प्रत्याशी सुबह से रात तक घर-घर दस्तक दे रहे हैं।
कहीं बुजुर्गों के पैर छुए जा रहे हैं, तो कहीं युवाओं से रोजगार और विकास के वादे किए जा रहे हैं। महिलाएं भी इस बार निर्णायक भूमिका में देखी जा रही हैं। स्वच्छता, पानी, सड़क, राशन और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं और जवाबों पर वोट तय किए जा रहे हैं। मौजूदा प्रधान जहां अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिना रहे है, वहीं नए चेहरे परिवर्तन का नारा बुलंद कर रहे हैं। कोई कहता है-गांव में सड़क आई तो कोई जवाब देता है लेकिन नाली आज भी अधूरी है। कहीं विकास कार्यों की सूची लहराई जा रही है, तो कहीं अधूरे वोट कामों की फाइलें खुल रही हैं। आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज है, लेकिन जनता अब केवल वादों से नहीं, काम के हिसाब से फैसला करने के मूड में दिख रही है।
चाय की दुकानों पर रणनीति बन रही है। युवा मतदाता सोशल मीडिया और मोबाइल संदेशों से भी प्रभावित हो रहे हैं। कुछ दावेदार बाइक रैलियों से ताकत दिखा रहे हैं. तो कुछ सादगी अपनाकर सेवक की छवि गढ़ रहे हैं। दिलचस्प यह है कि कई प्रत्याशी यह खुलकर कह रहे हैं। हुक्म करो मेरे आका यानी जनता जो कहेगी, वही किया जाएगा। कुल मिलाकर, 2026 का प्रधानी चुनाव सिर्फ एक पद का चयन नहीं, बल्कि गांव के भविष्य की दिशा तय करने वाला मुकाबला है।
जनता के सामने विकल्प कई हैं, लेकिन कसौटी एक ईमानदारी, उपलब्धता और वास्तविक विकास। अब देखना यह है कि कौन दावेदार जनता के भरोसे की कसौटी पर खरा उतरता है और किसके सिर सजेगा ग्राम प्रधान का ताज।



