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Saturday, August 15, 2026

Chandauli news- 13 मई को रखा जाएगा अचला एकादशी व्रत, भगवान विष्णु की कृपा पाने का विशेष संयोग

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.

परिवर्तन टुडे डेस्क
चंदौली। आचार्य पंडित लक्ष्मी नारायण पाण्डेय ने जानकारी देते हुए बताया कि ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अचला एकादशी इस वर्ष 13 मई 2026, बुधवार को श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मनाई जाएगी। इस दिन प्रीति योग और विषकुंभ योग का विशेष संयोग बन रहा है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना गया है। अचला एकादशी को अपरा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है और यह भगवान विष्णु को समर्पित पवित्र व्रत है।

पंडित लक्ष्मी नारायण पाण्डेय के अनुसार एकादशी तिथि 12 मई 2026 को दोपहर 2:52 बजे प्रारंभ होकर 13 मई को दोपहर 1:29 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत 13 मई को रखा जाएगा। वहीं व्रत का पारण 14 मई 2026 को प्रातः 5:31 बजे से 8:14 बजे के बीच किया जाएगा। द्वादशी तिथि 14 मई को सुबह 11:20 बजे समाप्त होगी।

उन्होंने बताया कि अचला एकादशी का धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना गया है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से मनुष्य के पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। शास्त्रों में इसे पाप-नाशक, पुण्यदायक और मोक्ष प्रदान करने वाला व्रत बताया गया है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी युधिष्ठिर को इस एकादशी के महत्व का वर्णन करते हुए कहा था कि यह बड़े-बड़े पातकों का नाश करने वाली एकादशी है।

पंडित लक्ष्मी नारायण पाण्डेय ने बताया कि व्रती को दशमी तिथि से ही नियमों का पालन शुरू कर देना चाहिए। सूर्यास्त के बाद भोजन न करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें। एकादशी के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करें और भगवान विष्णु की पूजा करें। पूजा में तिल, जौ, फूल, धूप, दीप, तुलसी दल, मिठाई और पंचामृत अर्पित करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ विशेष फलदायी माना गया है।

उन्होंने कहा कि इस दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है तथा दिन में सोने और नकारात्मक विचारों से बचना चाहिए। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया अपरा एकादशी व्रत सुख, समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।

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मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.
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