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Saturday, May 9, 2026
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ट्रैक्टर चलाकर अपनी शादी में पहुंचे दूल्हे राजा, गांव की इस बारात ने बदल दी लग्जरी स्टाइल की परिभाषा

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.
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महंगी कार, बग्घी, घोड़े से दूर ट्रैक्टर में हुई अगवानी

परिवर्तन टुडे डेस्क
उत्तर प्रदेश रायबरेली के डलमऊ में शादी में दूल्हे महंगी कार, सजी-धजी बग्घी, घोड़े आदि से अपनी दुल्हन लेने पहुंचते हैं। इसके उलट डलमऊ के जोहवा नटकी गांव में गुरुवार को एक ऐसी बारात पहुंची जिसने इस लग्जरी स्टाइल की परिभाषा ही बदल कर दी है। यहां दूल्हा किसी विदेशी कार में नहीं, बल्कि ट्रैक्टर पर सवार होकर आ गया। ट्रैक्टर की गड़गड़ाहट और दूल्हे के देसी अंदाज ने पूरे क्षेत्र में चर्चा छेड़ दी है। मूल-मालाओं से सजे ट्रेक्टर में दूल्हे राजा सवार थे। बराती डीजे में बज रहे गाने पर ट्रैक्टर के सामने नाच रहे थे। यह द्रश्य देकर लोग आश्चर्य चकित हो गए।

गुरुवार को शहजादपुर (नहरापुर) से देवी सेवक प्रजापति की पुत्री सोनी की बारात डलमऊ के जोहवा नटकी गांव पहुंची। ग्रामीण सड़क किनारे खड़े होकर फूलों से लदी गाड़ियों का इंतजार कर रहे थे, तभी दूर से ट्रैक्टर की चिर-परिचित आवाज सुनाई दी। नजारा ऐसा था कि सबकी निगाहें ठहर गई इसमें खुद दूल्हा स्टीयरिंग थामे ट्रैक्टर चला रहा था । उसके पीछे बाराती देसी ठाठ में डीजे की धुन पर झूमते हुए अगवानी का हिस्सा बने हुए थे।

दिखावे की संस्कृति से अलग रही बारात

ग्रामीणों ने यह बारात उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो शादियों में हैसियत दिखाने के चक्कर में कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। दूल्हे ने अपनी सादगी से यह साबित कर दिया कि अपनी संस्कृति और पेशे पर गर्व करना ही असली गौरव है।

खास रहा दूल्हे का ट्रैक्टर प्रेम

परिजनों ने बताया कि दूल्हे को खेती-किसानी से गहरा लगाव है। हाल ही में उन्होंने एक नया ट्रैक्टर खरीदा था और अपने जीवन के इस सबसे बड़े दिन के लिए उन्होंने अपने इसी ‘नए साथी’ को चुनकर उसे सम्मान दिया। लोग दूल्हे के इस ‘देसी स्वैग’ और उसकी सोच की सराहना करते नहीं थक रहे हैं। डलमऊ की इस शादी ने बता दिया कि शान-ओ-शौकत महंगी गाड़ियों में नहीं, बल्कि अपने संस्कारों को सीने से लगाकर चलने में है।

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