परिवर्तन टुडे न्यूज
नई दिल्ली। आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लाइज फेडरेशन (एआईएनपीएसईएफ) ने देशभर के शिक्षकों तथा राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली से आच्छादित कर्मचारियों के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। संगठन ने वेतन, सामाजिक सुरक्षा, सेवा संबंधी विसंगतियों, डिजिटल कार्य व्यवस्था तथा स्थानांतरण संबंधी सुविधाओं सहित अनेक विषयों पर आयोग का ध्यान आकृष्ट कराया।
आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई, सदस्य पूलक घोष, सदस्य पंकज जैन तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुई बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने कर्मचारियों की समस्याओं और अपेक्षाओं को विस्तार से रखा।
बैठक में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं प्रदेश अध्यक्ष अंकुर त्रिपाठी तथा प्रदेश संगठन मंत्री अमित कुमार पाण्डेय ने शिक्षकों एवं राष्ट्रीय पेंशन कर्मचारियों की समस्याओं, सेवा संबंधी विसंगतियों तथा सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से आयोग के समक्ष रखा। दोनों प्रतिनिधियों ने उत्तर प्रदेश सहित देशभर के कर्मचारियों की अपेक्षाओं और मांगों को मजबूती से प्रस्तुत करते हुए व्यापक सेवा सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया।
संगठन ने आयोग से 3.83 गुणक के आधार पर वेतन निर्धारण, गृह किराया भत्ता में वृद्धि, महंगाई भत्ते को मूल वेतन में समाहित करने, यातायात भत्ते और बाल शिक्षा भत्ते का पुनर्निर्धारण, प्रत्येक कर्मचारी के लिए डिजिटल भत्ता लागू करने तथा परिवार की परिभाषा को तीन से बढ़ाकर पांच सदस्यों तक करने की मांग की।
सामाजिक सुरक्षा पर विशेष बल
संगठन ने कहा कि वर्तमान राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली तथा एकीकृत पेंशन योजना कर्मचारियों को वृद्धावस्था में पर्याप्त सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध नहीं करा पा रही है। इसलिए कर्मचारियों के लिए सुनिश्चित और प्रभावी पेंशन व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। साथ ही मृत्यु एवं दिव्यांगता की स्थिति में पुरानी पेंशन योजना के अंतर्गत उपलब्ध सुविधाओं का लाभ नियमित, स्वैच्छिक तथा अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामलों में भी दिए जाने का सुझाव रखा गया।
शिक्षकों के लिए समान सेवा सुविधाओं की मांग
संगठन ने आयोग से आग्रह किया कि विश्वविद्यालयों के शिक्षकों तथा चिकित्सकों की भांति सभी शिक्षकों को भी बेहतर सेवा लाभ और 65 वर्ष तक सेवा का अवसर प्रदान किया जाए। इसके अतिरिक्त प्रत्येक वर्ष 30 दिन अर्जित अवकाश, 45 दिन सामाजिक दायित्व अवकाश तथा 45 दिन पारिवारिक देखभाल अवकाश उपलब्ध कराने की मांग भी की गई।
संगठन ने यह भी प्रस्ताव रखा कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों तथा स्वायत्त संस्थाओं में कार्यरत समान सेवा वर्ग के कर्मचारियों को समान सेवा सुविधाएं और समान अवसर उपलब्ध कराए जाएं, जिससे सेवा व्यवस्था में एकरूपता और पारदर्शिता स्थापित हो सके। बैठक के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल वेतन वृद्धि नहीं, बल्कि शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए सम्मानजनक सेवा शर्तें, सुदृढ़ सामाजिक सुरक्षा तथा न्यायपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
राष्ट्रीय प्रवक्ता अंकुर त्रिपाठी ने कहा कि आयोग के समक्ष प्रस्तुत सुझाव कर्मचारियों और शिक्षकों के दीर्घकालिक हितों से जुड़े हैं। वहीं प्रदेश संगठन मंत्री अमित कुमार पाण्डेय ने विश्वास व्यक्त किया कि आयोग कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक और दूरगामी अनुशंसाएं करेगा। दोनों नेताओं ने कहा कि शिक्षकों और राष्ट्रीय पेंशन कर्मचारियों के अधिकारों एवं सम्मान की रक्षा के लिए संगठन का प्रयास निरंतर जारी रहेगा।



