परिवर्तन टुडे न्यूज, चन्दौली
सकलडीहा। पीजी कॉलेज में बुधवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। महाविद्यालय में आयोजित सेवा संकल्प कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण और राष्ट्रगान से हुई। इसके बाद सभागार में महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. प्रदीप कुमार पांडेय ने पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया। इसके पश्चात प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया।

गांधी के शैक्षिक विचारों पर हुई गोष्ठी
कार्यक्रम के अगले चरण में महात्मा गांधी के जीवन-दर्शन एवं शैक्षिक विचारों पर गोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य वक्ता डॉ. अजय कुमार सिंह यादव ने गांधी जी के शैक्षिक विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा वही उपयोगी है, जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने के साथ रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में सहायक हो। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भी शिक्षा को कौशल, रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।

महाविद्यालय के उपप्राचार्य ने महात्मा गांधी के विचारों को देश की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सत्य, अहिंसा, स्वावलंबन और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे उनके सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं। बीएड के छात्र शशि भूषण ने गांधी जी के सत्य, अहिंसा एवं प्रेम के सिद्धांतों पर अपने विचार व्यक्त किए।
2047 के भारत निर्माण में गांधी के विचार उपयोगी : प्राचार्य
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. प्रदीप कुमार पांडेय ने महात्मा गांधी के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में गांधी जी के विचारों की उपयोगिता को समझना आवश्यक है। गांधी जी का जीवन सत्य, अहिंसा, स्वावलंबन और सेवा की प्रेरणा देता है।
उन्होंने देश के विकास में गांधी जी के ट्रस्टीशिप सिद्धांत को अपनाने के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि समाज के संसाधनों और संपदा का उपयोग व्यापक जनहित तथा सामाजिक कल्याण के लिए किया जाना चाहिए। गांधी जी के विचारों को जीवन में आत्मसात कर ही समतामूलक और सशक्त समाज की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के साथ हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।


