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Wednesday, May 6, 2026
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वकीलों ने डीएम पर जताया अविश्वास,जारी रहेगा हड़ताल

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.
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एसडीएम पिंडरा प्रतिभा व न्यायिक एसडीएम प्रज्ञा को हटाने की मांग पर अड़े वकील

वाराणसी। तहसील बार एसोसिएशन पिंडरा के अध्यक्ष कृपा शंकर पटेल व महामंत्री सुधीर कुमार सिंह के नेतृत्व में अधिवक्ता लामबंद होकर एसडीएम प्रतिभा मिश्रा व न्यायिक एसडीएम प्रज्ञा सिंह की मनमाने रवैये से क्षुब्ध होकर उन्हें हटाने की मांग को लेकर महीने भर से हड़ताल पर हैं।

अधिवक्ताओं का हड़ताल समाप्त होने के आसार उस समय दिखाई पड़ने लगे थे,जब सोमवार को पिंडरा तहसील के सभागार में सोमवार को समाधान दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने अधिवक्ताओं से बातचीत कर उनकी तमाम मांगों को मान लिया था। परंतु जिलाधिकारी ने एसडीएम प्रतिभा व न्यायिक एसडीएम प्रज्ञा को तत्काल हटाने पर राजी नहीं हुए। खैर उस समय तो ऐसा लगा कि अधिवक्ताओं का हड़ताल समाप्त हो जाएगा। परंतु मंगलवार को अधिवक्ताओं ने जब बैठक कर हड़ताल समाप्त करने का प्रस्ताव रखा तो,भारी संख्या में उपस्थित अधिवक्ताओं ने एक स्वर से कहा कि डीएम की बातों पर हम लोगों को विश्वास नहीं है। इसके पूर्व तत्कालीन डीएम ने भी झूठा आश्वासन देकर अधिवक्ताओं का हड़ताल समाप्त करवाया था, परंतु अपने बातों पर वे खरा नहीं उतरे थे।

तहसील बार एसोसिएशन पिंडरा के अध्यक्ष कृपा शंकर पटेल व महामंत्री सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि जब तक एसडीएम पिंडरा प्रतिभा मिश्रा व एसडीएम न्यायिक प्रज्ञा सिंह का स्थानांतरण नहीं हो जाता है तब तक हड़ताल जारी रहेगा।तहसील बार पिंडरा के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार से मांग किया है कि उपरोक्त आरोपी अधिकारियों को तत्काल स्थानांतरित कर बार-बेंच के बीच सामंजस्य स्थापित कराए,ताकि न्याय प्रणाली सुचारू ढंग से संचालित हो सके। बार अध्यक्ष कृपा शंकर पटेल व महामंत्री सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2024 में भी अधिवक्ताओं का एक आंदोलन चल रहा था, जिसमें तत्कालीन जिलाधिकारी ने आरोपी अधिकारियों के कार्य की समीक्षा कराने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट को जिम्मेदारी सौंपा था। परंतु न कोई समीक्षा हुई थी और न ही आरोपी अधिकारियों को हटाया गया था। इस बार के आंदोलन में भी यही नीति अपनी गई है जो अधिवक्ताओं को मंजूर नहीं है।

बैठक में शिवपूजन सिंह,पधारी यादव,राजेश सिंह, हरिश्चंद्र अजय श्रीवास्तव,प्रियराज माथुर,अंकित मिश्रा, नवीन सिंह, श्याम शंकर सिंह, आनंद सिंह, दीपक सैनी, अश्वनी सिंह,पवन सिंह,विजय शर्मा संजय दुबे, सतीश, आलोक सिंह,श्रीप्रकाश मिश्रा,सौरभ सिंह, श्रीनाथ गौंड,कौशल त्रिपाठी,शक्तिमान,अश्वनी मिश्रा, राकेश मिश्रा,भरत दुबे,कृष्णकांत चौहान, सियाराम यादव, संदीप वर्मा,कमलकांत राय,सुनील वर्मा,आलोक पाण्डेय,मनोज मिश्रा,हरिश्चंद्र यादव,वकील प्रसाद, शैलेंद्र सिंह,चंद्रभान पटेल,अजय यादव,आशीष दुबे, छेदी लाल पाल,शंभूनाथ मिश्रा,गिरीश पटेल,प्रकाश यादव, अशोक लाल, धीरेंद्र सिंह,सर्वेश सिंह,राजेश पटेल, गौरीशंकर सिंह,मनोज शुक्ला, विंध्यवासिनी तिवारी,प्रेमशंकर मिश्रा,अमर पटेल, छोटेलाल ,जावेद खा,सुभाष दुबे,दिनेश यादव ,काजल राय,श्याममोहन उपाध्याय शाहिद सैकड़ो अधिवक्ता शामिल रहे।

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