सकलडीहा पीजी कॉलेज में 21-22 सितंबर को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी पहलुओं पर होगा विचार-विमर्श
परिवर्तन टुडे न्यूज, चन्दौली
सकलडीहा। पीजी कॉलेज में समाजशास्त्र विभाग एवं पार्श्वनाथ विद्यापीठ वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में ‘विकसित भारत @2047 : चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ’ विषय पर 21 एवं 22 सितंबर को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। संगोष्ठी में देश-विदेश के शिक्षाविद, शोधकर्ता, विषय विशेषज्ञ एवं विद्यार्थी सहभागिता करेंगे। आयोजन को लेकर शनिवार को महाविद्यालय परिसर में प्रेस वार्ता आयोजित कर कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्य की जानकारी दी गई।
समावेशी और आत्मनिर्भर भारत पर होगा विचार
प्राचार्य प्रो. प्रदीप कुमार पाण्डेय ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केवल आर्थिक प्रगति पर्याप्त नहीं है, बल्कि सामाजिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और तकनीकी क्षेत्रों में भी व्यापक विकास आवश्यक है। इसी उद्देश्य को केंद्र में रखकर संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें वर्तमान चुनौतियों के साथ भविष्य की संभावनाओं पर गंभीर एवं शोधपरक विमर्श होगा।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 की संकल्पना समावेशी, आत्मनिर्भर, ज्ञान-आधारित और सामाजिक रूप से सशक्त भारत के निर्माण से जुड़ी है। इसके लिए समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता, शिक्षा का विस्तार, तकनीकी प्रगति और आर्थिक आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर गंभीर चिंतन आवश्यक है।
शिक्षा से लेकर तकनीक तक पर होगी चर्चा
दो दिवसीय संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में समाज, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, संस्कृति, तकनीक, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तीकरण, युवा शक्ति, सामाजिक न्याय और राष्ट्र निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। विभिन्न क्षेत्रों में भारत के समक्ष मौजूद चुनौतियों और विकास की संभावनाओं को लेकर प्रतिभागियों के बीच संवाद होगा।
संगोष्ठी में शोधार्थियों एवं अन्य प्रतिभागियों को अपने शोध-पत्र प्रस्तुत करने का अवसर भी मिलेगा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को समकालीन राष्ट्रीय विषयों पर अध्ययन, शोध और विचार-विमर्श का मंच उपलब्ध होगा।
अकादमिक संवाद को मिलेगा नया आयाम
संगोष्ठी संयोजक प्रो. दयाशंकर सिंह यादव ने कहा कि महाविद्यालय की ओर से समय-समय पर शैक्षणिक एवं राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर संगोष्ठियों और अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहा है। इसी क्रम में यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को राष्ट्रीय विकास से जुड़े समकालीन विमर्श से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में शोध की प्रवृत्ति विकसित होने के साथ ही विभिन्न विषयों पर व्यापक दृष्टिकोण विकसित होता है। संगोष्ठी के माध्यम से शिक्षा जगत के विशेषज्ञों और युवा शोधार्थियों के बीच संवाद को भी बढ़ावा मिलेगा।
प्रेस वार्ता के दौरान संगोष्ठी से जुड़े विभिन्न पक्षों की जानकारी देते हुए आयोजकों ने पत्रकार बंधुओं से कार्यक्रम की गतिविधियों एवं इससे जुड़े विचारों को व्यापक स्तर पर जनसामान्य तक पहुंचाने में सहयोग का आह्वान किया।


