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Wednesday, September 30, 2026
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ट्रेन की चपेट में आने से 19 वर्षीय युवक की मौत पर परिजनों में कोहराम

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.

परिवर्तन टुडे चन्दौली
सकलडीहा। कोतवाली क्षेत्र के घरचित गांव निवासी 19 वर्षीय एक युवक की देर रात गांव के समीप रेलवे लाइन पार करते समय ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गयी। सुबह रेलवे लाइन पर युवक की शव मिलने की सूचना पर परिजनों में कोहराम मच गया। सूचना पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पीएम की कार्रवाई में जुट गयी है। युवक शुक्रवार की देर रात घर पर पहुंचा था। परिजनों के लेट से पहुंचने की वजह पूछने से घर से निकल गया था।

घरचित गांव निवासी स्व.नंदलाल यादव के दो पुत्र शुभम यादव और शिवम यादव और एक पुत्री सुप्रिया है। वर्ष 2021 में किसान नंदलाल यादव की मौत हो गयी। जिसके बाद परिवार का भरण पोषण बड़ा बेटा शुभम यादव करता था। शुभम कुचमन में यूपी बैंक ऑफ बड़ौदा में बैंक मित्र है। छोटा भाई शिवम इंटर तक पढ़ाई करने के बाद परिजनों के साथ खेती बारी का काम देखता था। शिवम अक्सर दोस्तों के साथ पार्टी करके लेट से घर आता था। कई बार घर आकर भी लौट जाता था। सुबह आ जाता था।  शुक्रवार की भी देर रात घर पहुंचने पर परिजनों ने लेट से आने की वजह पूछने पर नाराजगी जताते हुए घर से निकल गया। परिजनों ने सोचा की सुबह आ जायेगा। लेकिन सुबह गांव के समीप रेलवे लाइन पर शव मिलने की सूचना मिलने पर परिजनों में कोहराम मच गया। माता चंदा देवी भाई शुभम भाभी प्रीतम और बहन सुप्रिया का रोते रोते बुरा हाल था। इस बाबत प्रभारी निरीक्षक अतुल प्रजापति ने बताया कि युवक की शव को पीएम कराने के बाद परिजनों को सौप दिया गया।

बेटे की मौत पर परिजनों का रोते रोते बुरा हाल

शिवम बचपन से चंचल और जिद्दी स्वभाव का लड़का था। सबसे छोटा होने पर घर का दुलारा भी था। लेकिन इसी दुलार के कारण आये दिन घर पर लेट से आने लगा। पूछने पर बार बार नाराज होकर घर से चला जाता था। सुबह गुस्सा शांत होने पर चला आता था। माता और भाई यह कहकर रो रहे थे कि काश घर पर सो गया होता तो नहीं जाती जान। परिजनों के लेट से आने की वजह पूछे जाने की बात को लेकर पछतावा हो रहा था।  माता चंदा देवी भाई शुभम भाभी प्रीतम और बहन सुप्रिया का रोते रोते बुरा हाल था।

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.
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