डॉ. विनय प्रकाश तिवारी की कलम से
चंदौली। आज के समय में लोग अपने मोबाइल फोन के माध्यम से महज 100 या 500 रुपये का सोना आसानी से खरीद लेते हैं। भुगतान होते ही मोबाइल की स्क्रीन पर सोने का ब्योरा दिखाई देने लगता है और खरीदार को लगता है कि उसने सोने में निवेश कर लिया है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि वास्तव में खरीदा क्या गया है और वह किस नियामकीय व्यवस्था के अंतर्गत आता है।
राष्ट्रीय शेयर बाजार (एनएसई) की हालिया घोषणा ने इसी सवाल को समझने का अवसर दिया है।
एनएसई ने ऑगमॉन्ट गोल्ड टेक को बनाया प्रमुख भागीदार
26 सितंबर को राष्ट्रीय शेयर बाजार (एनएसई) ने घोषणा की कि ऑगमॉन्ट एंटरप्राइजेज लिमिटेड की सहायक कंपनी ऑगमॉन्ट गोल्ड टेक को इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रसीद यानी ईजीआर को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख भागीदार के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
ऑगमॉन्ट समूह सोने के कारोबार, शोधन और वितरण से जुड़ा हुआ है। इस साझेदारी का उद्देश्य भौतिक सोने को इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रसीद में तथा ईजीआर को दोबारा भौतिक सोने में बदलने की प्रक्रिया को आसान बनाना और इस बाजार की पहुंच बढ़ाना है।
क्या होती है इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रसीद?
इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रसीद को आसान भाषा में सोने की इलेक्ट्रॉनिक रसीद समझा जा सकता है। निर्धारित मानकों के अनुरूप वास्तविक सोना पंजीकृत भंडारगृह में सुरक्षित रखा जाता है। इसके बदले जारी ईजीआर निवेशक के डीमैट खाते में दर्ज होती है।
ईजीआर की खरीद-बिक्री एनएसई पर की जा सकती है। इसके धारक निर्धारित प्रक्रिया और लागू शुल्कों के अनुसार भौतिक सोने की सुपुर्दगी का अनुरोध भी कर सकते हैं। अर्थात निवेशक के हाथ में तत्काल सोना मौजूद न होने के बावजूद उसके पीछे निर्धारित मात्रा और शुद्धता वाला भौतिक सोना सुरक्षित व्यवस्था में रखा रहता है।
डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ और ईजीआर एक नहीं
यह समझना बेहद जरूरी है कि मोबाइल ऐप के माध्यम से खरीदा जाने वाला सामान्य डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ और ईजीआर तीन अलग-अलग उत्पाद हैं।
ऐप आधारित डिजिटल गोल्ड वर्तमान में सेबी के सीधे नियामकीय दायरे में नहीं आता। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने ऐसे उत्पादों से जुड़े प्लेटफॉर्म तथा संचालन संबंधी जोखिमों को लेकर निवेशकों को सावधान किया है।
इसके विपरीत गोल्ड ईटीएफ और एक्सचेंज पर कारोबार होने वाला ईजीआर सेबी के नियामकीय ढांचे के अंतर्गत आते हैं। वहीं सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड एक अलग प्रकार की सरकारी प्रतिभूति है, जिसे भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा भारत सरकार की ओर से जारी किया जाता है।
यूपीआई से भुगतान करने पर उत्पाद नियामकीय नहीं हो जाता
एक आम गलतफहमी यह भी है कि यदि सोना खरीदने के लिए यूपीआई से भुगतान किया गया है तो वह उत्पाद स्वतः भारतीय रिजर्व बैंक के नियमन में आ गया।
ऐसा नहीं है। किसी उत्पाद का नियमन इस बात से तय नहीं होता कि उसके लिए भुगतान यूपीआई, बैंक खाते या किसी अन्य माध्यम से किया गया है। नियामकीय व्यवस्था इस बात पर निर्भर करती है कि खरीदा गया वित्तीय या स्वर्ण उत्पाद वास्तव में क्या है।
इसलिए केवल मोबाइल ऐप पर ‘गोल्ड’ लिखा देखकर उसके नियमन की धारणा बना लेना उचित नहीं है।
ऑगमॉन्ट की ईजीआर साझेदारी का अर्थ डिजिटल गोल्ड का ईजीआर बनना नहीं
ऑगमॉन्ट समूह डिजिटल गोल्ड से जुड़ी सेवाएं भी प्रदान करता है। लेकिन एनएसई के साथ ईजीआर से संबंधित उसकी साझेदारी का यह अर्थ नहीं है कि मोबाइल ऐप के माध्यम से खरीदा गया डिजिटल गोल्ड स्वतः ईजीआर में बदल जाता है।
ईजीआर की अपनी अलग व्यवस्था, नियम, भंडारण प्रणाली और बाजार संरचना है।
ईजीआर कारोबार पहले से उपलब्ध, नई घोषणा भूमिका को लेकर
यह भी स्पष्ट रहना चाहिए कि एनएसई पर ईजीआर की खरीद-बिक्री पहले से उपलब्ध है। 26 सितंबर की घोषणा ईजीआर की शुरुआत से संबंधित नहीं, बल्कि ऑगमॉन्ट गोल्ड टेक की नई भूमिका और साझेदारी से संबंधित है।
इस साझेदारी के माध्यम से ईजीआर की पहुंच और उपयोग बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि इससे सोने के मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव का जोखिम समाप्त नहीं होता। इसी तरह भंडारण, खरीद-बिक्री तथा भौतिक सोने की सुपुर्दगी से जुड़ी लागत और शर्तें भी बनी रहती हैं।
सोना खरीदने से पहले इन सवालों के जवाब जरूर जानें
अगली बार मोबाइल फोन पर ‘गोल्ड’ का विकल्प दिखाई दे तो केवल खाते में दिख रहे सोने के मूल्य या मात्रा पर ध्यान न दें। यह जरूर समझें कि आप कौन-सा उत्पाद खरीद रहे हैं।
क्या यह ऐप आधारित डिजिटल गोल्ड है?
क्या यह गोल्ड ईटीएफ है?
या फिर एनएसई पर खरीदा-बेचा जाने वाला ईजीआर है?
सोना खरीदने से पहले उसके नाम से अधिक महत्वपूर्ण उसके नियम, नियामकीय व्यवस्था, शुल्क, भौतिक सुपुर्दगी की शर्तें और उससे जुड़े जोखिमों को समझना है।
ऐसे ही सीखते रहिए, मुस्कुराते रहिए और जीवन का आनंद लेते रहिए।
लेखक: डॉ. विनय प्रकाश तिवारी, संस्थापक – एलटीपी कैलकुलेटर फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड एवं डैडीज इंटरनेशनल स्कूल एंड हॉस्टल, बिशुनपुरा कांटा, चंदौली, उत्तर प्रदेश।
उपयोगी स्रोत:
राष्ट्रीय शेयर बाजार — इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रसीद संबंधी जानकारी
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड — ईजीआर संबंधी जानकारी
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड — डिजिटल गोल्ड संबंधी सार्वजनिक चेतावनी
भारतीय रिजर्व बैंक — सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड संबंधी जानकारी
अस्वीकरण: यह लेख केवल वित्तीय जागरूकता के उद्देश्य से है। इसे व्यक्तिगत निवेश सलाह न माना जाए। किसी भी स्वर्ण उत्पाद में निवेश करने से पहले उसके दस्तावेज, शुल्क, भौतिक सुपुर्दगी की शर्तें और जोखिमों की स्वयं जांच करें।


