spot_img
27.4 C
Varanasi
Sunday, September 13, 2026
spot_img

Chandauli news- स्वयंभू महादेव की चौखट पर मिट जाता है मृत्यु का भय! सदियों पुराना है शिवधाम

spot_img
spot_img
spot_img
जरुर पढ़े
रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.

चतुर्भुजपुर के स्वयंभू कालेश्वर महादेव से जुड़ी है अनोखी आस्था, स्वप्न में दर्शन के बाद हुआ था मंदिर का निर्माण

परिवर्तन टुडे न्यूज, चन्दौली
सकलडीहा। विकास खंड क्षेत्र ‌के चतुर्भुजपुर कस्बे में स्थित स्वयंभू कालेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि यहां स्वयं प्रकट हुए भगवान भोलेनाथ के दर्शन-पूजन मात्र से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और अकाल मृत्यु का भय भी टल जाता है। सावन के दिनों में यहां श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ती है और लोग भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-शांति की कामना करते हैं।

बताया जाता है कि करीब दो शताब्दी पूर्व राजस्थान के अलवर जिले से आया राजपूताना काफिला सकलडीहा कोट में ठहरा था। उस समय बनारस स्टेट में बाबू बखत सिंह सेनापति के पद पर थे। एक रात उन्हें स्वप्न में स्वयंभू कालेश्वर महादेव के दर्शन हुए। इसके बाद चतुर्भुजपुर और बरठी गांव के समीप मंदिर निर्माण के लिए खुदाई शुरू कराई गई। खुदाई के दौरान स्वयंभू शिवलिंग मिलने के बाद बाबू बखत सिंह ने मंदिर का निर्माण कराया। तभी से यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बन गया। मंदिर से जुड़ी एक घटना आज भी स्थानीय लोगों के बीच आस्था और चर्चा का विषय बनी हुई है।

स्थानीय मान्यता के अनुसार ब्रिटिश काल में रेल पथ निर्माण से जुड़े अधिकारी रॉबिन विक्टर एग्जलेंडर स्टॉक मंदिर की दहलीज को छोटा कर प्लेटफार्म का विस्तार कराने की योजना को लेकर निरीक्षण के लिए विशेष सैलून से पहुंचे थे। बताया जाता है कि मंदिर से कुछ दूरी पहले ही उनका विशेष सैलून पलट गया, जिसमें 4 अगस्त 1928 को अधिकारी की मृत्यु हो गई।

स्थानीय लोगों का मानना है कि मंदिर की दहलीज में बदलाव करने की योजना के कारण यह घटना हुई। अधिकारी की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी ने उनकी स्मृति में शिलापट्ट लगवाया और प्लेटफार्म विस्तार का कार्य बंद कर वापस लौट गईं। हालांकि यह घटना स्थानीय मान्यता के रूप में ही प्रचलित है। आज भी श्रद्धालुओं का विश्वास है कि स्वयंभू कालेश्वर महादेव के दर्शन और सच्चे मन से पूजन करने से जीवन के संकट दूर होते हैं।

मंदिर के प्रशासनिक अधिकारी पीयूष तिवारी ने बताया कि स्वयंभू कालेश्वर महादेव के दर्शन-पूजन से श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति मिलती है और लोग अपनी मनोकामनाओं के साथ यहां पहुंचते हैं। सदियों पुरानी आस्था के कारण यह प्राचीन शिवधाम आज भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

spot_img
रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.
लेटेस्ट पोस्ट

Chandauli news- बाबा कीनाराम जन्मोत्सव की विदाई में नागा संन्यासियों के धुएं के बीच हुआ नृत्य-गान

परिवर्तन टुडे न्यूज, चंदौली चहनियां। घोरे के घोर अघोराचार्य बाबा कीनाराम की जन्मस्थली एवं तपस्थली रामगढ़ में तीन दिवसीय जन्मोत्सव कार्यक्रम के समापन के बाद रविवार को विदाई का अद्भुत एवं आध्यात्मिक नजारा देखने को मिला। अघोर पंथ एवं वैष्णवी परंपरा के साधु-संतों ने बाबा कीनाराम का दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद संतों को […]

ख़बरें यह भी

error: Content is protected !!
Enable Notifications OK No thanks