परिवर्तन टुडे न्यूज, चन्दौली
सकलडीहा। सकलडीहा पी.जी. कॉलेज के हिंदी विभाग, पुस्तकालय एवं अपनी माटी संस्थान, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “प्रेमचंद के सपनों का भारत” का शुक्रवार को भव्य शुभारंभ हुआ। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए शिक्षाविदों, प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की गरिमामयी उपस्थिति में प्रेमचंद के साहित्य, सामाजिक सरोकारों और राष्ट्र निर्माण में उनकी विचारधारा की प्रासंगिकता पर गंभीर विमर्श हुआ।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ, अतिथियों का हुआ भव्य स्वागत
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। हिंदी विभागाध्यक्ष एवं उप प्राचार्य प्रो. दयानिधि सिंह यादव ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी भारतीय समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने अपने साहित्य के माध्यम से समाज की वास्तविक समस्याओं को स्वर दिया और मानवीय मूल्यों की स्थापना का संदेश दिया।

प्रेमचंद का साहित्य सामाजिक न्याय और भारतीय संस्कृति का सशक्त दस्तावेज — प्राचार्य
राष्ट्रीय संगोष्ठी की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. प्रदीप कुमार पांडेय ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि प्रेमचंद का साहित्य भारतीय संस्कृति, सामाजिक न्याय, समानता और मानवीय मूल्यों का सशक्त दस्तावेज है। उनके सपनों के भारत की परिकल्पना आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी उनके समय में थी।
प्रेमचंद की कहानियाँ भारत के वास्तविक समाज का आईना — प्रो. आनंद वर्धन शर्मा
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. आनंद वर्धन शर्मा ने कहा कि प्रेमचंद की कहानियाँ भारत के वास्तविक सामाजिक जीवन का प्रतिबिंब हैं। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने अपने साहित्य के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का कार्य किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. अशोक कुमार ज्योति ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से पूर्व ही प्रेमचंद ने अपनी कहानियों के माध्यम से समाज में व्याप्त अनेक कुरीतियों एवं समस्याओं पर सशक्त प्रहार किया था।
राष्ट्र निर्माण में प्रेमचंद की विचारधारा आज भी प्रासंगिक
मुख्य वक्ता डॉ. हरीश कुमार तथा वक्ता डॉ. ज्योति सिंह ने प्रेमचंद के साहित्य, सामाजिक सरोकारों, राष्ट्र निर्माण एवं समकालीन भारत में उनकी विचारधारा की उपयोगिता पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि नई पीढ़ी को प्रेमचंद के आदर्शों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
संचालन और धन्यवाद ज्ञापन ने बढ़ाई आयोजन की गरिमा
कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन डॉ. जितेंद्र यादव ने किया, जबकि डॉ. प्रमोद कुमार पांडेय ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन सचिव डॉ. श्यामलाल सिंह यादव तथा संयोजक श्री अजय कुमार यादव (एसोसिएट प्रोफेसर, पुस्तकालय) ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विभिन्न महाविद्यालयों के विद्वानों की रही उल्लेखनीय सहभागिता
संगोष्ठी में एल.बी.एस. महाविद्यालय से प्रो. राजीव कुमार, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. अमितेश सिंह एवं डॉ. संदीप जायसवाल, अग्रसेन महाविद्यालय से डॉ. सुधा यादव एवं मेनका सिंह, तथा जी.डी. बिनानी महाविद्यालय से डॉ. ऋषभ यादव सहित महाविद्यालय के समस्त शिक्षकगण, कर्मचारीगण, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रथम दिवस प्रेमचंद के साहित्य और उनके आदर्शों पर हुए गंभीर चिंतन ने यह संदेश दिया कि साहित्य केवल समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम भी है।



