शिक्षा व्यक्ति के चरित्र, व्यक्तित्व और सामाजिक चेतना के निर्माण का आधार : प्रो. प्रदीप कुमार पांडेय
परिवर्तन टुडे न्यूज, चन्दौली
सकलडीहा। विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर सोमवार को सकलडीहा पीजी कॉलेज में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा के महत्व, शिक्षकों की भूमिका तथा राष्ट्र निर्माण में शिक्षक समुदाय के योगदान पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. प्रदीप कुमार पांडेय ने की।
शिक्षक समाज के मार्गदर्शक और राष्ट्र के भविष्य के निर्माता
अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य प्रो. प्रदीप कुमार पांडेय ने कहा कि शिक्षक समाज के मार्गदर्शक और राष्ट्र के भविष्य के निर्माता होते हैं। शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के चरित्र, व्यक्तित्व और सामाजिक चेतना के निर्माण का आधार है। उन्होंने कहा कि बदलते तकनीकी परिवेश में शिक्षकों को विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं से भी जोड़ना होगा।
तकनीक के दौर में शिक्षक की भूमिका और भी महत्वपूर्ण
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. दयाशंकर सिंह यादव ने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माता होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान तकनीकी युग में शिक्षा के स्वरूप में तेजी से बदलाव हो रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीक ज्ञान प्राप्त करने के प्रभावी साधन हैं, लेकिन विद्यार्थियों में मानवीय संवेदना, नैतिक मूल्य, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने में शिक्षक की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रहेगी।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में शिक्षकों की भूमिका केंद्रीय है। शिक्षक विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता, अनुशासन, सामाजिक समरसता और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समर्पित शिक्षक ही किसी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति होते हैं।
शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का प्रमुख माध्यम
डॉ. राजेश यादव ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन का भी प्रमुख माध्यम है। यह व्यक्ति को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाती है तथा समाज को प्रगतिशील दिशा प्रदान करती है।
कार्यक्रम का संचालन बीएड विभाग के डॉ. अजय कुमार यादव ने किया। उन्होंने विश्व शिक्षक दिवस की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी का संबंध केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन का संबंध है।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. इंद्रजीत सिंह ने अतिथियों, प्राचार्य, शिक्षकगण, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षकगण, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।


