परिवर्तन टुडे
चंदौली। बुद्धवार को प्रभारी जिला कृषि रक्षा अधिकारी विनोद कुमार यादव ने किसानों से बुवाई से पहले बीज और भूमि शोधन करने का आग्रह किया है। उन्होंने बताया कि ऐसा करने से फसलों में बाद में होने वाले महंगे रोगों से बचा जा सकता है, जिनकी रोकथाम खड़ी फसल में करना काफी खर्चीला होता है।
यादव ने स्पष्ट किया कि बीज शोधन से बीज जनित बीमारियों पर आसानी से नियंत्रण पाया जा सकता है। यह प्रक्रिया बीज पर चिपके रसायनों के माध्यम से आक्रमणकारी फफूंदियों को नष्ट कर देती है, जिससे फसलें स्वस्थ रहती हैं।
धान की फसल में मिथ्या कंडुआ, झुलसा और धारीदार रोग जैसे रोगों के नियंत्रण के लिए विशेष उपाय बताए गए हैं। किसानों को बुवाई से पहले प्रति किलोग्राम बीज में 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत या 2.5 ग्राम थीरम 75 प्रतिशत मिलाकर उपचारित करना चाहिए।
उड़द और मूंग में उकठा रोग की रोकथाम के लिए प्रति किलोग्राम बीज में 5 ग्राम ट्राइकोडरमा मिलाकर बुवाई करने की सलाह दी गई है। भूमि शोधन के लिए 2.5 किलोग्राम ट्राइकोडरमा को 50 किलोग्राम सड़ी गोबर की खाद में मिलाकर एक सप्ताह तक छाया में रखने के बाद अंतिम जुताई के समय खेत में मिलाना चाहिए। इससे भूमि जनित बीमारियों का नियंत्रण होता है।
दीमक प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को 2.5 किलोग्राम ब्यूवैरिया वैसियाना 1 प्रतिशत डब्लू०पी० को 50 किलोग्राम गोबर की खाद में मिलाकर खेत में प्रयोग करने की सलाह दी गई है। यह विधि दीमक नियंत्रण में प्रभावी है।
समस्त बीज शोधक रसायन विकास खंडों में स्थित कृषि रक्षा इकाईयों पर 75 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध हैं, जिससे किसान इन उत्पादों का आसानी से लाभ उठा सकें।



