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Wednesday, July 29, 2026
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Chandauli news- स्वयंभू महादेव की चौखट पर मिट जाता है मृत्यु का भय! सदियों पुराना है शिवधाम

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.

चतुर्भुजपुर के स्वयंभू कालेश्वर महादेव से जुड़ी है अनोखी आस्था, स्वप्न में दर्शन के बाद हुआ था मंदिर का निर्माण

परिवर्तन टुडे न्यूज, चन्दौली
सकलडीहा। विकास खंड क्षेत्र ‌के चतुर्भुजपुर कस्बे में स्थित स्वयंभू कालेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि यहां स्वयं प्रकट हुए भगवान भोलेनाथ के दर्शन-पूजन मात्र से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और अकाल मृत्यु का भय भी टल जाता है। सावन के दिनों में यहां श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ती है और लोग भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-शांति की कामना करते हैं।

बताया जाता है कि करीब दो शताब्दी पूर्व राजस्थान के अलवर जिले से आया राजपूताना काफिला सकलडीहा कोट में ठहरा था। उस समय बनारस स्टेट में बाबू बखत सिंह सेनापति के पद पर थे। एक रात उन्हें स्वप्न में स्वयंभू कालेश्वर महादेव के दर्शन हुए। इसके बाद चतुर्भुजपुर और बरठी गांव के समीप मंदिर निर्माण के लिए खुदाई शुरू कराई गई। खुदाई के दौरान स्वयंभू शिवलिंग मिलने के बाद बाबू बखत सिंह ने मंदिर का निर्माण कराया। तभी से यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बन गया। मंदिर से जुड़ी एक घटना आज भी स्थानीय लोगों के बीच आस्था और चर्चा का विषय बनी हुई है।

स्थानीय मान्यता के अनुसार ब्रिटिश काल में रेल पथ निर्माण से जुड़े अधिकारी रॉबिन विक्टर एग्जलेंडर स्टॉक मंदिर की दहलीज को छोटा कर प्लेटफार्म का विस्तार कराने की योजना को लेकर निरीक्षण के लिए विशेष सैलून से पहुंचे थे। बताया जाता है कि मंदिर से कुछ दूरी पहले ही उनका विशेष सैलून पलट गया, जिसमें 4 अगस्त 1928 को अधिकारी की मृत्यु हो गई।

स्थानीय लोगों का मानना है कि मंदिर की दहलीज में बदलाव करने की योजना के कारण यह घटना हुई। अधिकारी की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी ने उनकी स्मृति में शिलापट्ट लगवाया और प्लेटफार्म विस्तार का कार्य बंद कर वापस लौट गईं। हालांकि यह घटना स्थानीय मान्यता के रूप में ही प्रचलित है। आज भी श्रद्धालुओं का विश्वास है कि स्वयंभू कालेश्वर महादेव के दर्शन और सच्चे मन से पूजन करने से जीवन के संकट दूर होते हैं।

मंदिर के प्रशासनिक अधिकारी पीयूष तिवारी ने बताया कि स्वयंभू कालेश्वर महादेव के दर्शन-पूजन से श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति मिलती है और लोग अपनी मनोकामनाओं के साथ यहां पहुंचते हैं। सदियों पुरानी आस्था के कारण यह प्राचीन शिवधाम आज भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

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रजनी कांत पाण्डेय
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मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.
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