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Wednesday, September 30, 2026
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Chandauli news- लक्ष्मणगढ़ में गूंजी परीक्षित की कथा, श्रीकृष्ण की लीला सुन भक्ति में डूबे श्रद्धालु

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रजनी कांत पाण्डेय
रजनी कांत पाण्डेय
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.

लक्ष्मणगढ़ में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन संतदास जी महाराज ने सुनाई राजा परीक्षित के जन्म और मोक्ष की कथा

परिवर्तन टुडे न्यूज, चंदौली
चहनियां। स्थानीय क्षेत्र के लक्ष्मणगढ़ गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन बुधवार को संतदास जी महाराज ने राजा परीक्षित के जन्म, उनके जीवन और मोक्ष की कथा का मनोरम वर्णन किया। कथा का श्रवण कर श्रद्धालु भक्ति के सागर में गोते लगाते नजर आए। महाराज जी ने कथा के प्रसंगों को सरल एवं भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

भगवान श्रीकृष्ण ने गर्भ में प्रवेश कर की थी परीक्षित की रक्षा

संतदास जी महाराज ने कहा कि महाभारत युद्ध के बाद अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ से राजा परीक्षित का जन्म हुआ। उनके गर्भ की रक्षा स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अपने योगबल से की थी। जब अश्वत्थामा ने पांडवों के वंश का अंत करने के उद्देश्य से उत्तरा के गर्भ पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया, तब उत्तरा ने संकट की घड़ी में भगवान श्रीकृष्ण को पुकारा।

भगवान श्रीकृष्ण ने अपने सूक्ष्म स्वरूप में गर्भ में प्रवेश कर दिव्यास्त्र के प्रभाव को निष्फल कर शिशु की रक्षा की। महाराज जी ने बताया कि गर्भ में जिस सांवले स्वरूप ने राजा परीक्षित की रक्षा की थी, जन्म के बाद बालक चारों ओर उसी स्वरूप को खोजने लगा। इसी कारण उनका नाम परीक्षित पड़ा। परीक्षित का अर्थ है—जो सबकी परीक्षा करे अथवा चारों ओर देखकर खोज करे।

भगवान द्वारा रक्षित होने के कारण कहलाए विष्णुरात

संतदास जी महाराज ने कहा कि भगवान विष्णु अर्थात श्रीकृष्ण द्वारा रक्षित होने के कारण राजा परीक्षित का एक नाम विष्णुरात भी पड़ा। बड़े होकर राजा परीक्षित ने अपने राज्य का विस्तार किया और जीवन के अंतिम उद्देश्य तथा मुक्ति के मार्ग पर चिंतन किया।

उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित को जब अपने जीवन की अंतिम अवस्था का बोध हुआ, तब उन्होंने श्रीशुकदेव जी महाराज से श्रीमद्भागवत कथा का ज्ञान प्राप्त किया। सात दिनों तक भागवत कथा का श्रवण कर राजा परीक्षित ने भगवान की भक्ति में अपना मन लगाया और अंततः मोक्ष को प्राप्त हुए।

कथा के दौरान राजेंद्र पांडेय, जयश्याम त्रिपाठी, डॉ. के.एन. पांडेय, संजय त्रिपाठी, विंध्याचल तिवारी, धीरेंद्र कुमार पांडेय, आनंद मिश्रा, दीनानाथ यादव, अर्जुन सिंह, आनंद प्रकाश मिश्रा, दिवाकर पांडेय, राजेश्वर, अलख निरंजन, गोल्डी पांडेय, श्याम सुंदर सिंह, योगेंद्र सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे और श्रद्धालुओं ने श्रीमद्भागवत कथा का रसपान किया।

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रजनी कांत पाण्डेय
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मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.
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