मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.
ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य चुनौतियों से मिली प्रेरणा, अस्पताल-एम्बुलेंस समन्वय के लिए बनाया डिजिटल प्रारूप
परिवर्तन टुडे न्यूज, चन्दौली Story By- नीरज अग्रहरि कमालपुर। जहां अधिकांश छात्र अपनी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में व्यस्त रहते हैं, वहीं चंदौली जनपद के कमालपुर कस्बा निवासी प्रमोद रस्तोगी के 16 वर्षीय पुत्र राधे कृष्ण रस्तोगी ने स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में उल्लेखनीय पहल की है। उन्होंने आपातकालीन परिस्थितियों में अस्पताल और एम्बुलेंस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से “आपका बचाव (Lifenerula)” नाम से एक प्रारंभिक तकनीकी मॉडल (एमवीपी) विकसित किया है।
अस्पताल और एम्बुलेंस के लिए अलग-अलग डैशबोर्ड
राधे कृष्ण द्वारा तैयार इस तकनीकी मॉडल का उद्देश्य आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में सूचना के त्वरित आदान-प्रदान को आसान और व्यवस्थित बनाना है। इसके लिए अस्पतालों तथा एम्बुलेंस सेवाओं के लिए अलग-अलग डैशबोर्ड तैयार किए गए हैं, जिससे दोनों पक्ष आवश्यक जानकारी साझा कर समय पर मरीज को उपचार उपलब्ध कराने में सहयोग कर सकें।
ग्रामीण समस्याओं से मिली नवाचार की प्रेरणा
राधे कृष्ण रस्तोगी ने बताया कि इस परियोजना का विचार उन्हें अपने क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियों और समय पर एम्बुलेंस उपलब्ध न होने की समस्या को देखकर आया। उनका उद्देश्य ऐसा सरल और उपयोगी समाधान विकसित करना है, जिससे दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में भी मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके।
“मेरा लक्ष्य ऐसा सिस्टम विकसित करना है, जिससे कोई भी मरीज केवल सूचना के अभाव में इलाज से वंचित न रहे।” — राधे कृष्ण रस्तोगी
फोटो:राधे कृष्ण रस्तोगी
पायलट परियोजना की तैयारी शुरू
वर्तमान में यह परियोजना अपने प्रारंभिक तकनीकी चरण (एमवीपी) में है। राधे कृष्ण का अगला लक्ष्य स्थानीय अस्पतालों और एम्बुलेंस सेवाओं के सहयोग से इसका पायलट परीक्षण शुरू करना है। परीक्षण के दौरान प्राप्त सुझावों और अनुभवों के आधार पर इस प्रणाली को और अधिक प्रभावी तथा जनसुलभ बनाया जाएगा।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जोड़ने की है योजना
राधे कृष्ण का सपना केवल चंदौली तक सीमित नहीं है। भविष्य में वे इस प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का समावेश करना चाहते हैं, ताकि मरीज की स्थिति के अनुसार सबसे उपयुक्त अस्पताल का चयन स्वतः हो सके। प्रारंभिक परीक्षण सफल होने के बाद इस प्रणाली को वाराणसी, लखनऊ और दिल्ली जैसे बड़े चिकित्सा नेटवर्क से जोड़ने की भी उनकी योजना है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बना नवाचार
कमालपुर जैसी ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर तकनीक और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में किया गया राधे कृष्ण रस्तोगी का यह प्रयास पूरे जनपद ही नहीं, बल्कि प्रदेश के युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनकर उभर रहा है। उनका मानना है कि—
“बड़े बदलाव केवल महानगरों से नहीं, बल्कि छोटे गांवों और कस्बों से भी शुरू हो सकते हैं।”
यह पहल इस बात का प्रमाण है कि यदि सोच सकारात्मक हो और उद्देश्य समाजहित का हो, तो कम उम्र भी बड़े नवाचार की राह में बाधा नहीं बनती।
मैं रजनीकांत पाण्डेय पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ इस दौरान कई राष्ट्रिय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त ख़बरों के डिजिटल माध्यम को चुना है,मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना है एवं न्याय दिलाना है जिसमे आपका सहयोग प्रार्थनीय है.